बारामती (महाराष्ट्र)।
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार से जुड़ी हालिया विमान दुर्घटना के बाद एक बार फिर बारामती हवाई अड्डा सुर्खियों में आ गया है। यह पहला मौका नहीं है जब इस एयरपोर्ट पर विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ हो। बीते कुछ वर्षों में बारामती हवाई अड्डे पर कई बार ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट और छोटे विमानों के क्रैश होने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिसने उड़ान सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, बारामती हवाई अड्डा मुख्य रूप से पायलट ट्रेनिंग और छोटे विमानों के संचालन के लिए उपयोग में लाया जाता है। यहां विभिन्न फ्लाइंग स्कूल संचालित होते हैं, जहां ट्रेनी पायलटों को प्रशिक्षण दिया जाता है। इसी दौरान तकनीकी खराबी, मानवीय चूक या मौसम संबंधी कारणों से कई बार विमान हादसे का शिकार हुए हैं।
2019 में भी हो चुका है बड़ा हादसा
साल 2019 में बारामती एयरपोर्ट पर एक ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट टेकऑफ के दौरान संतुलन खो बैठा था और रनवे के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस घटना में विमान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ था, हालांकि पायलट को मामूली चोटें आई थीं। उस समय भी तकनीकी खामी को हादसे का कारण बताया गया था।
2023 में फिर दोहराई गई घटना
इसके बाद वर्ष 2023 में एक बार फिर इसी एयरपोर्ट पर ट्रेनिंग फ्लाइट के दौरान विमान क्रैश हुआ। बताया गया कि उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद विमान में तकनीकी खराबी आ गई, जिसके बाद पायलट ने आपात लैंडिंग की कोशिश की, लेकिन विमान रनवे से फिसलकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे के बाद नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने जांच के आदेश दिए थे और कुछ समय के लिए उड़ानों पर रोक भी लगाई गई थी।
2026 में अजित पवार से जुड़ी घटना
अब 2026 में बारामती एयरपोर्ट एक बार फिर चर्चा में है, जब उपमुख्यमंत्री अजित पवार से संबंधित विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ।
क्यों होते हैं बार-बार हादसे?
विशेषज्ञों के अनुसार, बारामती हवाई अड्डे पर अधिकांश दुर्घटनाएं ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट से जुड़ी हैं। ट्रेनी पायलटों द्वारा उड़ान भरने के दौरान छोटी-सी चूक भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। इसके अलावा पुराने विमानों का उपयोग, रखरखाव में लापरवाही और सीमित इंफ्रास्ट्रक्चर भी दुर्घटनाओं की बड़ी वजह माने जा रहे हैं।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बाद स्थानीय लोगों और विमानन विशेषज्ञों ने बारामती एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था की गहन समीक्षा की मांग की है। उनका कहना है कि यदि यह एयरपोर्ट पायलट ट्रेनिंग के लिए उपयोग में लाया जा रहा है, तो यहां सुरक्षा मानकों का और अधिक सख्ती से पालन होना चाहिए।