चाईबासा। झारखंड पुलिस ने नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक और ऐतिहासिक सफलता हासिल करते हुए भाकपा (माओवादी) के शीर्ष नेतृत्व को करारा झटका दिया है। केंद्रीय सशस्त्र बलों के सहयोग से चलाई गई संयुक्त कार्रवाई में सारंडा के घने जंगलों में पुलिस ने माओवादियों की कमर तोड़ दी। इस भीषण मुठभेड़ में भाकपा (माओवादी) के केंद्रीय कमेटी सदस्य और एक करोड़ रुपये के इनामी नक्सली अनल दा उर्फ पतिराम मांझी को मार गिराया गया। एनकाउंटर में अनल दा के साथ कुल 15 नक्सलियों के मारे जाने की पुष्टि हुई है, जिनमें कई इनामी माओवादी शामिल बताए जा रहे हैं।
आईजी अभियान माइकल राज ने अनल दा के मारे जाने की आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि यह ऑपरेशन लंबे समय से चल रहे खुफिया इनपुट के आधार पर योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई नक्सल नेटवर्क की कमर तोड़ने में मील का पत्थर साबित होगी और झारखंड में शांति बहाली की दिशा में बड़ी सफलता है।
झारखंड पुलिस मुख्यालय के अनुसार, 22 जनवरी 2026 की सुबह करीब 6 बजे चाईबासा जिले के सारंडा क्षेत्र में माओवादी दस्ते की मौजूदगी की पुख्ता सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर पुलिस, सीआरपीएफ और अन्य केंद्रीय सशस्त्र बलों की संयुक्त टीम ने इलाके की घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। इसी दौरान घने जंगलों में छिपे माओवादियों ने सुरक्षा बलों पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने मोर्चा संभालते हुए माओवादियों को चारों ओर से घेर लिया।
करीब कई घंटों तक चली मुठभेड़ में दोनों ओर से भारी गोलीबारी हुई। सुरक्षा बलों की रणनीतिक बढ़त और सटीक कार्रवाई के चलते माओवादी दस्ते को भारी नुकसान उठाना पड़ा। मुठभेड़ समाप्त होने के बाद चलाए गए सर्च अभियान में 15 नक्सलियों के शव बरामद किए गए। घटनास्थल से एके-47, इंसास राइफल, एसएलआर, पिस्टल, कारतूस, विस्फोटक सामग्री और बड़ी मात्रा में दैनिक उपयोग का सामान भी जब्त किया गया है।
अनल दा उर्फ पतिराम मांझी को माओवादी संगठन का रणनीतिक मास्टरमाइंड माना जाता था। वह वर्षों से सारंडा, कोल्हान और आसपास के इलाकों में नक्सली गतिविधियों को संचालित कर रहा था। उसके खिलाफ झारखंड, बिहार और ओडिशा में कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे। सुरक्षा बलों पर हमले, विकास कार्यों में बाधा और निर्दोष ग्रामीणों को धमकाने जैसी घटनाओं में उसकी संलिप्तता बताई जाती रही है। अनल दा के मारे जाने से माओवादी संगठन की कमान और नेटवर्क को गहरा झटका लगा है।
आईजी अभियान माइकल राज ने बताया कि फिलहाल पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी है, ताकि किसी भी संभावित खतरे को पूरी तरह समाप्त किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षा बल सतर्क हैं और क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त बलों की तैनाती की गई है। स्थानीय प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
इस सफलता को राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन ने नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक कदम बताया है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में भी ऐसे ऑपरेशन जारी रहेंगे और झारखंड को नक्सल मुक्त बनाने की दिशा में अभियान और तेज किया जाएगा। सारंडा में हुई यह कार्रवाई न केवल सुरक्षा बलों के मनोबल को बढ़ाने वाली है, बल्कि नक्सली संगठनों के लिए कड़ा संदेश भी है कि कानून से बच पाना अब संभव नहीं होगा।
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