15–20 दिनों से ठप जलापूर्ति, जनता बेहाल
बरहरवा।
बरहेट प्रखंड क्षेत्र की मेघा जलापूर्ति योजना हमेशा से समस्याओं के जाल में फंसी रही है। स्थिति यह है कि क्षेत्र में लगभग 15 से 20 दिनों से जलापूर्ति पूरी तरह ठप पड़ी हुई है।
लोग बताते हैं कि हर बार की तरह इस बार भी योजना कुछ दिनों तक ठीक-ठाक चलती रही, लोगों के चेहरे पर उम्मीद जगी, लेकिन फिर सप्लाई बंद हो गई। योजना से जुड़े कर्मियों से कारण पूछने पर हर बार अलग-अलग बहाने सामने आते हैं—कभी कर्मियों को वेतन भुगतान नहीं होने से हड़ताल, कभी सामग्री की कमी, तो कभी जल स्रोत सूखने की समस्या।
इंट्रा-कैप जल संग्रहालय सूखा
इस बार जलापूर्ति ठप रहने का कारण इंट्रा-कैप जल संग्रहालय (कुंवा) का सूख जाना बताया जा रहा है। विभाग के जेई संजीव कुमार का कहना है कि गुमानी बाराज परियोजना के सभी फाटक खोल दिए जाने से जल संग्रहालय में पानी नहीं ठहर पा रहा है।
उनके मुताबिक, अदालत के आदेश पर गुमानी बाराज के सभी उपकरण व डीजी सेट सील कर दिए गए हैं। ऐसे में फाटक का संचालन ठीक ढंग से नहीं हो पा रहा है और पानी का स्टॉक करना संभव नहीं है। बीते दिनों बाढ़ की आशंका को देखते हुए मजदूर लगाकर सभी फाटक खोले गए थे, जिससे बाढ़ पर नियंत्रण तो हो गया, लेकिन अब पानी की कमी गंभीर रूप से सामने आ गई है।
शानदार योजना अब ‘सेल्फी प्वाइंट’
जनता का कहना है कि मेघा जलापूर्ति परियोजना और गुमानी बाराज अब केवल ‘शोभा की वस्तु’ बनकर रह गए हैं। पानी तो मिलता नहीं, लेकिन दिनभर यहां लोग सेल्फी लेने के लिए जरूर जुटते रहते हैं।
विभागों की चुप्पी, जनता परेशान
स्थिति यह है कि सभी संसाधन और ढांचा मौजूद होने के बावजूद दोनों विभाग जिम्मेदारी से पल्ला झाड़कर बैठे हुए हैं। नतीजा यह है कि पूरे क्षेत्र की जनता जल संकट झेलने को मजबूर है।