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सरकार के फरमान को ठेंगा दिखाते पटना के अपराधी

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सरकार के फरमान को ठेंगा दिखाते पटना के अपराधी

प्रभाकर कुमार श्रीवास्तव (संपादक) बिहार की राजधानी पटना में अपराध रुकने का नाम नहीं ले रहा है। पटना में अपराधी अपराध करने में तनिक भी हिचक नहीं रहे हैं, मानो अपराधी पटना में बे लगाम हो गए हों। कभी प्रख्यात व्यापारी गोपाल खेमका की हत्या, कभी बालू व्यापारी की हत्या,तो कभी वकील की हत्या दिनदहाड़े…

सरकार के फरमान को ठेंगा दिखाते पटना के अपराधी
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सरकार के फरमान को ठेंगा दिखाते पटना के अपराधी

प्रभाकर कुमार श्रीवास्तव (संपादक)

बिहार की राजधानी पटना में अपराध रुकने का नाम नहीं ले रहा है। पटना में अपराधी अपराध करने में तनिक भी हिचक नहीं रहे हैं, मानो अपराधी पटना में बे लगाम हो गए हों। कभी प्रख्यात व्यापारी गोपाल खेमका की हत्या, कभी बालू व्यापारी की हत्या,तो कभी वकील की हत्या दिनदहाड़े पटना की जमीन पर कर दी जा रही है।

पटना की जमीन पर महज400 रूपये की लूट के लिए अपराधियों द्वारा गोलियां चला दी जा रही है। इन सभी घटनाओं को अपराधियों ने महज एक महीने के अंदर अंजाम दिया है। हालांकि पटना पुलिस प्रशासन के द्वारा कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी भी की गई है। परंतु सवाल यह खड़ा होता है कि पटना पुलिस प्रशासन के द्वारा मात्र कुछ ही घटना में आरोपित आरोपियों की गिरफ्तारी मात्र से क्या बिहार में अपराध पर लगाम लगेगा और आम जनता मनोवैज्ञानिक दबाव से उबर पाएगी।

मात्र एक महीने पहले ही बिहार सरकार के द्वारा एक फरमान जारी किया गया और पटना के वरीय पुलिस अधीक्षक अवकाश कुमार का तबादला कर दिया गया। कारण शायद मात्र यह की पटना में अपराधी बे लगाम हो गए हैं। और सरकार ने पूर्णिया के पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय शर्मा पर अपना विश्वास जमाया और उन्हें पटना का वरीय पुलिस अधीक्षक बनाया गया।

एक ऐसे पुलिस अधिकारी को पटना की कमान सौंप दी गई, जिनके कार्यकाल में अर्थात पूर्णिया जिले में कई महीनो तक ग्राम रक्षा दल के नाम पर फर्जी थाने का संचालन होता रहा,और पूर्णिया की पुलिस प्रशासन गहरी नींद में सोती रही। अवकाश कुमार जो पूर्व में भोजपुर, बेगूसराय,दरभंगा जिलों में पुलिस कप्तान के रुप में अपनी बेहतरीन सेवा देने के लिए जाने जाते हैं। और वहां की आम जनता आज भी उनके बेहतरीन काम को याद करती है।

पटना की कमान संभालते ही अवकाश कुमार द्वारा अपराधियों पर लगाम लगाने के लिए कई कड़े फैसले लिएं गए। कई मुख्य घटनाओं का पर्दाफाश किया गया और आरोपियों को जेल भी भेजा गया। अवकाश कुमार के द्वारा चेकिंग अभियान से लेकर रात्रि गश्त पर भी काम किया गया।

उसके बावजूद महज पांच महीने में ही सरकार द्वारा फरमान जारी कर अवकाश कुमार का तबादला कर दिया गया। हालांकि नए पुलिस कप्तान कार्तिकेय शर्मा के आने के बाद तो पटना की जमीं और भी खून से लाल हो चुकी है।

मानो सरकार के इस फरमान को पटना के अपराधियों ने ठेंगा दिखाने का काम किया है। क्या सुशासन सरकार अब फिर से फरमान जारी करेगी और किसी और पुलिस अधिकारी को पटना की कमान सौंपेगी, क्या सरकार कार्तिकेय शर्मा पर विश्वास बनाए रखेगी।

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