पाकुड़ की सड़कों पर बिखरी संथाली लोकसंस्कृति की छटा, पारंपरिक वेशभूषा और मोरपंख से सजे दासाय नृत्य दल ने मोहा मन
Pakud News

रिपोर्ट केशव तिवारी,
पाकुड़ संवाददाता ।दुर्गापूजा संपन्न होते ही शुक्रवार को पाकुड़ शहर की सड़कों पर संथाली लोकसंस्कृति की अनूठी छटा बिखर गई। संथाल समुदाय के पारंपरिक दासाय नृत्य दल ने अपनी मनमोहक प्रस्तुति से शहरवासियों का ध्यान खींचा। पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकार जब लोकवाद्ययंत्रों की धुन पर कदमताल करते हुए शहर के बाजारों से गुजरे, तो राहगीरों की निगाहें उन पर ठहर गईं। कुछ देर के लिए बाजार की चहल-पहल के बीच लोकसंस्कृति का रंग छा गया।
मोरपंख की सजावट और पारंपरिक वेशभूषा ने खींचा ध्यान
दासाय नृत्य दल में शामिल पुरुष कलाकार सफेद पारंपरिक वस्त्रों में सजे थे। सिर पर बंधे सफेद कपड़े और मोरपंख से सजी पारंपरिक सजावट उनकी प्रस्तुति को खास बना रही थी। लोकवाद्ययंत्रों की लय के साथ कलाकारों की सामूहिक कदमताल ने माहौल को आकर्षक बना दिया। शहर के बाजार क्षेत्र से गुजरते नृत्य दल को देखने के लिए लोग रुकते नजर आए। इस दौरान संथाली संस्कृति की विशिष्ट पहचान और पारंपरिक कला की खूबसूरती लोगों के सामने आई।

आधुनिकता के बीच अपनी सांस्कृतिक जड़ों को सहेजने की झलक
दासाय नृत्य संथाल समुदाय की सांस्कृतिक पहचान और पीढ़ियों से चली आ रही लोकपरंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। दुर्गापूजा के बाद पाकुड़ की सड़कों पर इसकी प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि लोककलाएं आज भी समाज की सांस्कृतिक पहचान को जीवंत बनाए हुए हैं। ऐसे आयोजन और पारंपरिक प्रस्तुतियां नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने के साथ जनजातीय संस्कृति को व्यापक पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाती हैं। पाकुड़ की सड़कों पर बिखरी दासाय नृत्य की छटा ने शहरवासियों को संथाली लोकजीवन की समृद्ध परंपरा से रूबरू कराया।
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