स्कूल में ताला लगाकर मेले में मिठाई बेच रहे गुरुजी! राजमहल में दो दिनों से ठप पढ़ाई, 64 बच्चों का भविष्य दांव पर
मलाहीटोला के सरकारी स्कूल की बदहाली उजागर, दोपहर 12:30 बजे तक लटका रहा ताला; शिक्षक बोले- बच्चे नहीं आये तो स्कूल में रहकर क्या करते?

निशांत कुमार सोनू,
- डीएसई सख्त, कहा- जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी शिक्षक पर होगी कार्रवाई
मंगलहाट।सरकारी स्कूलों में बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के दावों के बीच साहिबगंज जिले के राजमहल प्रखंड से शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करने वाला मामला सामने आया है। उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय मलाहीटोला में कथित तौर पर दो दिनों से ताला लटका है, जबकि यहां 64 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं और पढ़ाई की जिम्मेदारी एकमात्र शिक्षक मनोज कुमार साहा के पास है। आरोप है कि विद्यालय में बच्चों को पढ़ाने के बजाय प्रभारी प्रधानाध्यापक दुर्गापूजा मेले में मिठाई की दुकान चलाते नजर आये। गुरुवार दोपहर करीब 12:30 बजे तक विद्यालय बंद रहने की बात सामने आने के बाद ग्रामीणों में नाराजगी है। विद्यालय बंद रहने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने के साथ मध्याह्न भोजन योजना के संचालन पर भी सवाल उठ रहे हैं।

स्कूल पर ताला, मेले में दुकान! बच्चों की पढ़ाई का क्या?
ग्रामीणों के अनुसार, बुधवार को शिक्षक कुछ देर के लिए विद्यालय आये थे, जबकि गुरुवार को उनके नहीं पहुंचने का आरोप है। ग्रामीणों का दावा है कि विद्यालय लगातार दो दिनों से बंद है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब स्कूल में पढ़ाई ही नहीं होगी, तो बच्चों की शिक्षा का नुकसान कौन पूरा करेगा? विद्यालय में एक ही शिक्षक पदस्थापित होने के कारण उनकी अनुपस्थिति का असर पूरी शैक्षणिक व्यवस्था पर पड़ सकता है।
64 बच्चों के लिए एक शिक्षक, फिर भी विद्यालय बंद रहने का आरोप
विद्यालय में 64 बच्चों का नामांकन है। ऐसे में एकमात्र शिक्षक की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। ग्रामीणों का आरोप है कि शिक्षक अक्सर विद्यालय से अनुपस्थित रहते हैं। यदि जांच में लगातार अनुपस्थिति और विद्यालय बंद रहने की पुष्टि होती है, तो यह बच्चों की पढ़ाई के साथ सरकारी शिक्षा व्यवस्था की निगरानी पर भी गंभीर सवाल होगा।
कुछ अभिभावकों ने आशंका जतायी कि शिक्षक का विरोध करने पर उनके बच्चों को पोशाक और छात्रवृत्ति जैसी सरकारी सुविधाओं से वंचित किया जा सकता है। हालांकि, इस आशंका की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अभिभावकों की चिंता है कि बच्चों की शिक्षा और सरकारी सुविधाओं को लेकर उन्हें भय के माहौल में नहीं रहना चाहिए।
संयोजिका ने कहा- बच्चे नहीं आये, इसलिए नहीं बना भोजन
विद्यालय की संयोजिका चांदनी देवी ने बताया कि पिछले दो दिनों से छात्र-छात्राएं विद्यालय नहीं आ रहे हैं। इसी कारण मध्याह्न भोजन नहीं बन रहा है। वहीं, विद्यालय प्रबंधन समिति की अध्यक्ष हिना कुमारी ने फोन पर बताया कि उन्हें लगा था कि दुर्गापूजा के कारण सभी सरकारी विद्यालयों में छुट्टी होगी। इसलिए उन्होंने विद्यालय बंद रहने को सामान्य समझा। उन्होंने कहा कि वह शिक्षक से इस संबंध में बात करेंगी।
दोनों के बयानों के बीच अब यह जांच का विषय है कि विद्यालय बंद रहने की वास्तविक वजह क्या थी, बच्चों की अनुपस्थिति की स्थिति क्या रही और निर्धारित शैक्षणिक कार्य क्यों नहीं हुआ।
मेले में मिठाई बेचते दिखे गुरुजी, कैमरे पर बयान देने से किया इनकार
जानकारी के अनुसार, प्रभारी प्रधानाध्यापक मनोज कुमार साहा मंगलहाट दुर्गापूजा मेले में अपनी मिठाई की दुकान पर मिठाई बनाते और बेचते नजर आये। उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने कैमरे पर बयान देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वह फिलहाल दुकान पर हैं और विद्यालय पहुंचकर अपना पक्ष रखेंगे।
विद्यालय बंद रहने के सवाल पर शिक्षक ने कहा, “जब एक भी छात्र विद्यालय नहीं आया, तो वहां रहकर क्या करते?” इसके बाद उनका फोन बंद होने के कारण उनसे आगे संपर्क नहीं हो सका।
हालांकि, बच्चों के विद्यालय नहीं आने का शिक्षक का दावा और ग्रामीणों की ओर से विद्यालय बंद रहने की शिकायत- दोनों बिंदुओं की जांच जरूरी है। इससे ही स्पष्ट होगा कि विद्यालय बंद रहने और पढ़ाई प्रभावित होने के लिए जिम्मेदारी किसकी बनती है।
डीएसई ने लिया संज्ञान, दोषी मिलने पर होगी सख्त कार्रवाई
मामले पर साहिबगंज की जिला शिक्षा अधीक्षक (डीएसई) उर्मिला हांसदा ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी। मामले की पूरी जांच करायी जा रही है और रिपोर्ट के आधार पर दोषी शिक्षक के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक एवं कानूनी कार्रवाई की जायेगी।
बड़ा सवाल: बच्चों की पढ़ाई की निगरानी कौन कर रहा है?
सरकारी विद्यालयों में बच्चों की नियमित पढ़ाई सुनिश्चित करना शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी है। ऐसे में मलाहीटोला विद्यालय को लेकर उठी शिकायतें केवल एक शिक्षक की कथित अनुपस्थिति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विद्यालय की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती हैं। यदि विद्यालय दो दिनों तक बंद रहा, तो संबंधित अधिकारियों और विद्यालय प्रबंधन समिति को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली? क्या नियमित निरीक्षण किया जा रहा था? और बच्चों की पढ़ाई के नुकसान की भरपाई कैसे होगी?
अब ग्रामीणों की निगाहें जांच रिपोर्ट और विभागीय कार्रवाई पर टिकी हैं। जांच में आरोप सही साबित होते हैं, तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई के साथ बच्चों की पढ़ाई नियमित कराने की ठोस व्यवस्था भी जरूरी होगी।
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