बदली धारा से कटाव तेज, दूसरे दिन भी मौके पर डटे डीआरएम
450 मजदूर और मशीनें जुटीं, सुरक्षा के लिए डाउन लाइन रहेगी ब्लॉक; यात्रियों की बढ़ी परेशानी

रिपोर्ट : निशांत कुमार सानू,
तालझारी। गंगा की बदली धारा ने साहिबगंज-तालझारी रेलखंड की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। महाराजपुर रेलवे स्टेशन के समीप नदी का कटाव लगातार तेज होने से रेल पटरी की सुरक्षा को लेकर रेलवे अलर्ट है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मालदा डीआरएम मनीष गुप्ता शनिवार को लगातार दूसरे दिन भी प्रभावित स्थल पर डटे रहे। उन्होंने मौके पर चल रहे कटावरोधी कार्यों का निरीक्षण किया और अधिकारियों के साथ स्थिति की समीक्षा की।
शुक्रवार की तुलना में शनिवार को बढ़ा कटाव
डीआरएम ने बताया कि शुक्रवार की तुलना में शनिवार को कटाव और तेज हुआ है। गंगा की धारा की रफ्तार भी बढ़ी है। नदी की धारा में प्राकृतिक बदलाव के कारण नया मोड़ बना है, जिससे रेल लाइन के समीप कटाव का खतरा बढ़ गया है। रेलवे की अभियंता टीम लगातार स्थिति पर नजर रख रही है और उपलब्ध संसाधनों के साथ बचाव कार्य जारी है।

स्लीपर, बोल्डर और डस्ट से बचाव कार्य
कटाव प्रभावित हिस्से को सुरक्षित करने के लिए रेल स्लीपर, तार से कैरेटिंग, बोल्डर और डस्ट की फिलिंग करायी जा रही है। मशीनों के साथ बड़ी संख्या में रेलकर्मी और मजदूर बचाव कार्य में जुटे हैं। पहले करीब 180 मीटर क्षेत्र में मशीनों से काम कराया जा रहा था, जिसे अब 120 मीटर के संवेदनशील हिस्से तक केंद्रित कर दिया गया है।
रेलवे के रेलकर्मी, गैंगमैन और ट्रैकमैन के अलावा रेल संवेदकों के करीब 450 मजदूर प्रतिदिन बचाव कार्य में लगाए गये हैं। मजदूरों के लिए मौके पर मेस की व्यवस्था भी शुरू कर दी गयी है।

यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च,डाउन लाइन रहेगी ब्लॉक
डीआरएम ने स्पष्ट किया कि यात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जायेगा। इसी वजह से डाउन लाइन को फिलहाल पूरी तरह ब्लॉक रखा गया है। ट्रेनों के परिचालन को लेकर पहले जारी आदेश को अगले आदेश तक प्रभावी रखा गया है। रेल सेवा सामान्य होने के लिए यात्रियों को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है।
100 किमी के दायरे में सड़क बनी सहारा
रेल परिचालन प्रभावित होने का सीधा असर यात्रियों पर पड़ रहा है। लंबी दूरी के यात्रियों के साथ साहिबगंज जिले के विभिन्न हिस्सों में आने-जाने वाले लोगों को भी परेशानी हो रही है। करीब 100 किलोमीटर के दायरे में ऑटो और टोटो ही आवागमन का प्रमुख सहारा बने हुए हैं।
रेल सेवा बाधित होने से यात्रियों को वैकल्पिक साधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। फिलहाल रेलवे का पूरा ध्यान गंगा के कटाव को नियंत्रित कर रेलखंड को सुरक्षित करने पर है।
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