
प्रेम कुमार साहू की रिपोर्ट,
घाघरा (गुमला)। प्रखण्ड क्षेत्र के चपका गांव में शहीद संतोष उरांव की प्रतिमा पिछले करीब एक महीने से क्षतिग्रस्त होकर जमीन पर पड़ी हुई है। हैरानी की बात यह है कि इतने लंबे समय के बाद भी प्रतिमा की मरम्मत और पुनर्स्थापना को लेकर कोई ठोस पहल नहीं की गई है, जिससे स्थानीय लोगों में गहरी नाराजगी देखी जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि शहीद की प्रतिमा केवल एक मूर्ति नहीं, बल्कि उनके बलिदान, संघर्ष और गौरवशाली इतिहास की प्रतीक है। ऐसे में उसका इस तरह उपेक्षित अवस्था में पड़े रहना न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि समाज की संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़ा करता है।

पुण्यतिथि से पहले बढ़ी चिंता
गौरतलब है कि आगामी 17 नवंबर को शहीद संतोष उरांव की चौथी पुण्यतिथि मनाई जानी है। हर वर्ष इस अवसर पर प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। लेकिन इस बार पुण्यतिथि से पहले ही प्रतिमा का टूटा हुआ और जमीन पर पड़ा होना एक गंभीर स्थिति को दर्शा रहा है।
स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि क्या इस बार भी नेता और अधिकारी केवल औपचारिकता निभाने के लिए पहुंचेंगे, या उससे पहले शहीद की प्रतिमा को सम्मानपूर्वक पुनर्स्थापित किया जाएगा?
“फूल चढ़ाने से पहले सुध लें जिम्मेदार”
ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि सिर्फ माल्यार्पण और श्रद्धांजलि देने से शहीदों का सम्मान नहीं होता, बल्कि उनके स्मारकों की देखरेख भी उतनी ही जरूरी है। उन्होंने मांग की है कि पुण्यतिथि से पहले प्रतिमा की मरम्मत कर उसे उचित स्थान पर स्थापित किया जाए।
स्थायी रखरखाव की मांग
स्थानीय लोगों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से यह भी मांग की है कि केवल अस्थायी समाधान नहीं, बल्कि प्रतिमा स्थल के लिए स्थायी रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसमें नियमित साफ-सफाई, सौंदर्यीकरण और सुरक्षा की व्यवस्था शामिल हो, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।
अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि 17 नवंबर से पहले जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाते हैं या नहीं।
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