
लिट्टीपाड़ा/संवाददाता।
लिट्टीपाड़ा प्रखंड के रांगा गांव में करोड़ों रुपये की लागत से बना डिग्री कॉलेज प्रशासनिक उपेक्षा और विभागीय सुस्ती का शिकार बनकर बेकार पड़ा है। भवन निर्माण पूरा हुए लगभग एक वर्ष बीत चुका है, लेकिन अब तक यहां पठन-पाठन शुरू नहीं हो सका है, जिससे क्षेत्र के छात्र-छात्राओं और युवाओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
आदिवासी पहाड़िया बहुल इस सुदूर क्षेत्र में कॉलेज की स्थापना को उच्च शिक्षा की दिशा में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा था, लेकिन संचालन शुरू नहीं होने से यह उम्मीद अधूरी नजर आ रही है।

उच्च शिक्षा के लिए दूर जाना मजबूरी
रांगा और आसपास के गांवों के विद्यार्थियों को मैट्रिक और इंटर के बाद स्नातक की पढ़ाई के लिए आज भी पाकुड़, दुमका या अन्य शहरों का रुख करना पड़ता है। आर्थिक तंगी और सीमित यातायात साधनों के कारण खासकर छात्राओं को पढ़ाई जारी रखने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
भवन तैयार, व्यवस्था नदारद
कॉलेज भवन पूरी तरह तैयार है, लेकिन अब तक न तो शिक्षकों की नियुक्ति हुई है और न ही नामांकन प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके चलते करोड़ों रुपये की लागत से तैयार यह शैक्षणिक ढांचा उपयोग में नहीं आ पा रहा है।
ग्रामीणों और युवाओं की मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल भवन बना देने से उद्देश्य पूरा नहीं होगा। कॉलेज में शिक्षकों, कर्मचारियों और जरूरी संसाधनों की व्यवस्था कर नियमित कक्षाएं शुरू करना आवश्यक है।
जल्द सत्र शुरू करने की मांग
ग्रामीणों और छात्र संगठनों ने जनप्रतिनिधियों, शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि आगामी सत्र से कॉलेज में नामांकन और पढ़ाई शुरू कराई जाए, ताकि क्षेत्र के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए बाहर न जाना पड़े।
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