गुमला में जंगली हाथियों का कहर: गांवों में दहशत,फसलें और घर तबाह
Gumla news

गुमला जिले के भरनो, डुमरी और कामडरा प्रखंडों के कई गांव पिछले लगभग 15 दिनों से जंगली हाथियों के आतंक से जूझ रहे हैं। क्षेत्र में सक्रिय करीब आधा दर्जन हाथियों ने ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है। इन हाथियों ने अब तक कई घरों को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ सैकड़ों एकड़ में खड़ी फसलों को रौंदकर पूरी तरह नष्ट कर दिया है।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, हाथियों का झुंड दिन के समय घने जंगलों में रहता है, लेकिन रात होते ही गांवों और खेतों की ओर रुख कर लेता है। इससे लोगों में लगातार डर का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों को रातभर जागकर मशाल और आग जलाकर हाथियों को भगाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने बताया कि इस स्थिति में सबसे ज्यादा चिंता छोटे बच्चों और परिवार की सुरक्षा को लेकर बनी हुई है। हाथी धान और मक्के जैसी खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे किसानों की सालभर की मेहनत पर पानी फिरता दिख रहा है।
डुमरी प्रखंड के बेरी गांव के समीप सेमिनार जंगल क्षेत्र में तीन हाथियों ने डेरा जमा रखा है, जिससे आसपास के गांवों में दहशत और बढ़ गई है। वहीं कामडरा प्रखंड के मुरूमकेला, रेडवा, सरिता और आसपास के इलाकों में हाथियों ने कई घरों की दीवारें तोड़ दी हैं और अनाज सहित घरेलू सामान को भी नष्ट कर दिया है।
वन विभाग के वनरक्षक अखिल अहमद ने बताया कि अमलीया-रायकेरा जंगल क्षेत्र में दो हाथियों की गतिविधि लगातार देखी जा रही है। विभाग द्वारा लाउडस्पीकर के माध्यम से ग्रामीणों को सतर्क किया जा रहा है और खेतों की ओर जाने से बचने की सलाह दी जा रही है।

वन विभाग की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में पटाखे और मशाल भी वितरित किए गए हैं, ताकि ग्रामीण हाथियों को भगाने में सक्षम हो सकें। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि वे जंगली हाथियों के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ न करें और पूरी सावधानी बरतें।
ग्रामीणों का कहना है कि हर साल धान पकने के समय नवंबर-दिसंबर में हाथियों का झुंड इलाके में पहुंचता है और भारी नुकसान करता है, लेकिन इस बार स्थिति और गंभीर हो गई है क्योंकि हाथी तीन महीने पहले ही गांवों की ओर आ गए हैं।
करीब एक सप्ताह पहले महूगांव टंगरा टोली में एक दर्दनाक घटना में 65 वर्षीय शनि उरांव की जंगली हाथी के हमले में मौत हो गई थी, जब वह सुबह शौच के लिए बाहर निकले थे। इससे पहले भी कई घर क्षतिग्रस्त होने और बच्चों के घायल होने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
लगातार बढ़ते हाथी आतंक से ग्रामीणों में भय का माहौल है और लोग प्रशासन से जल्द स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।
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