शिक्षकों की दो टूक पढ़ाने दें, कागजी काम में न उलझाएं; गैर-शैक्षणिक बोझ से मुक्ति की मांग
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पाकुड़ संवाददाता। विघालयो में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को लेकर लगातार चर्चा होती है, लेकिन शिक्षकों के सामने मौजूद प्रशासनिक और गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ भी उनकी बड़ी चिंता बनता जा रहा है। इसी को लेकर झारखंड प्रगतिशील शिक्षक संघ, संथाल परगना इकाई की बैठक सोमवार को लड्डू बाबू बगान में हुई। बैठक में शिक्षकों की लंबित समस्याओं के समाधान के साथ संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने को लेकर कई अहम निर्णय लिए गए।बैठक की अध्यक्षता मोहम्मद इकबाल अहमद ने की। इस दौरान संगठन के विस्तार और शिक्षकों से जुड़े मुद्दों को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।

तीन प्रखंडों में संगठन का होगा विस्तार
बैठक में हिरणपुर,लिट्टीपाड़ा और अमड़ापाड़ा प्रखंडों में प्रखंड कमिटी के गठन का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही अधिक से अधिक शिक्षकों को संगठन से जोड़ने के लिए सदस्यता अभियान चलाने और सदस्यता शुल्क संग्रह करने पर भी सहमति बनी।संघ का मानना है कि संगठन जितना मजबूत होगा, शिक्षकों से जुड़े मुद्दों को उतनी ही प्रभावी तरीके से संबंधित स्तर पर उठाया जा सकेगा।
अंतर-जिला स्थानांतरण की प्रक्रिया सरल करने की मांग
बैठक में शिक्षकों की स्थानांतरण प्रक्रिया भी प्रमुख मुद्दा रही। विशेष रूप से अंतर-जिला स्थानांतरण की प्रक्रिया को सरल और सुगम बनाने पर जोर दिया गया।शिक्षकों का कहना है कि स्थानांतरण से जुड़ी प्रक्रियाएं अनावश्यक रूप से जटिल होने के बजाय पारदर्शी और समयबद्ध होनी चाहिए, ताकि पात्र शिक्षकों को लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े।
सेवा पुस्तिका अपडेट में देरी पर भी चिंता
शिक्षकों की सेवा संबंधी दस्तावेजों को समय पर अपडेट करने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। बैठक में सेवा पुस्तिका को अद्यतन रखने और प्रत्येक वर्ष की वार्षिक वृद्धि को समय पर दर्ज करने पर जोर दिया गया।संघ ने इसे शिक्षकों के सेवा रिकॉर्ड का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए प्रशासनिक स्तर पर तेजी लाने की आवश्यकता जताई।
शिक्षक का मूल काम पढ़ाना, गैर-शैक्षणिक काम नहीं
बैठक में शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों के बोझ से मुक्त करने की मांग प्रमुखता से उठी। संघ ने कहा कि शिक्षकों की ऊर्जा और समय का बड़ा हिस्सा यदि ऐसे कार्यों में खर्च होगा, तो इसका सीधा असर विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था पर पड़ सकता है।इसी क्रम में अनावश्यक प्रतिनियोजन पर हर हाल में रोक लगाने की मांग भी की गई। संघ का जोर रहा कि शिक्षकों की उपलब्धता विद्यालयों में बनी रहे और उन्हें आवश्यकता से इतर कार्यों में नहीं लगाया जाए।
हर महीने होगी बैठक, संगठन को मिलेगा नया तेवर
बैठक में संघ के सशक्तिकरण और नियमित गतिविधियों को लेकर भी निर्णय लिए गए। प्रत्येक माह बैठक आयोजित करने पर सहमति बनी, ताकि शिक्षकों की समस्याओं को लगातार सामने लाया जा सके और उनके समाधान की दिशा में सामूहिक प्रयास किया जा सके।
बैठक से निकला संदेश
बैठक में उठे मुद्दों को अगर एक पंक्ति में समेटें तो शिक्षकों की मांग साफ है प्रशासनिक प्रक्रियाएं सरल हों, सेवा संबंधी काम समय पर हों और शिक्षक को गैर-शैक्षणिक दायित्वों से मुक्त कर उसे उसके मूल दायित्व यानी शिक्षण कार्य पर केंद्रित होने का अवसर मिले।
अब देखना यह होगा कि संघ की बैठक में उठाए गए ये मुद्दे संगठन के प्रस्तावों से निकलकर प्रशासनिक स्तर पर कितनी तेजी से समाधान तक पहुंचते हैं।बैठक में हीरालाल साह, lमोहम्मद किबरिया,मोहम्मद नजरुल इस्लाम,अनवर हुसैन,संदीप पाण्डेय, पोखन महतो,मोहम्मद इरशाद आलम,मोहम्मद जुल्फेकार आदि मौजूद थे.
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