पाकुड़ में शेरशाहवादी समाज ने जाति प्रमाण-पत्र निर्गत कराने की उठाई मांग
2014 के बाद प्रमाण-पत्र जारी होने पर लगी रोक

पाकुड़ संवाददाता। शेरशाहवादी (मुस्लिम) समाज के लोगों ने जाति प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया को पुनः शुरू कराने की मांग को लेकर उपायुक्त के नाम डीडीसी अरविंद कुमार लाल को ज्ञापन सौंपा है। यह आवेदन भारतीय शेरशाहबादी डेवलपमेंट सोसायटी की जिला इकाई की ओर से दिया गया।
ज्ञापन में अध्यक्ष बाबर शेख, उपाध्यक्ष अधिवक्ता अब्दुल हन्नान एवं सचिव मो. आजफारूल शेख ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
2014 के बाद प्रमाण-पत्र जारी होने पर लगी रोक
समाज के प्रतिनिधियों ने बताया कि संयुक्त बिहार काल से ही शेरशाहवादी (मुस्लिम) समुदाय के लोगों को जाति प्रमाण-पत्र जारी किए जाते रहे हैं। झारखंड गठन के बाद भी यह प्रक्रिया वर्ष 2014 तक नियमित रूप से चलती रही, लेकिन इसके बाद बिना किसी स्पष्ट सरकारी आदेश के प्रमाण-पत्र जारी होना बंद कर दिया गया।
प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि अंचल कार्यालय से लेकर जिला कल्याण पदाधिकारी तक कई बार जानकारी लेने के प्रयास किए गए, लेकिन रोक से संबंधित कोई आधिकारिक आदेश उपलब्ध नहीं कराया गया।
सरकारी आदेशों का हवाला दिया गया
आवेदन में झारखंड सरकार के कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग के पत्रांक 1764 (25 फरवरी 2019) एवं पत्रांक 476 (25 जनवरी 2024) का हवाला दिया गया है। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि इन आदेशों में प्रक्रिया से जुड़े आवश्यक दिशा-निर्देश मौजूद हैं, बावजूद इसके जिले में प्रमाण-पत्र जारी नहीं हो रहे हैं।
छात्र-छात्राओं को हो रही परेशानी
समाज ने कहा कि जाति प्रमाण-पत्र की सबसे अधिक आवश्यकता छात्र-छात्राओं को शिक्षा, छात्रवृत्ति, सरकारी योजनाओं और अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए होती है। प्रमाण-पत्र नहीं बनने के कारण बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रक्रिया स्पष्ट करने की मांग
प्रतिनिधियों ने उपायुक्त से अनुरोध किया है कि संबंधित अंचल अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी कर प्रमाण-पत्र निर्गत करने की प्रक्रिया पुनः सुचारू की जाए। साथ ही यदि किसी प्रशासनिक या कानूनी कारण से रोक है, तो उससे संबंधित सरकारी आदेश या अधिसूचना को सार्वजनिक किया जाए, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके।
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