पाकुड़ संवाददाता। पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले में रोजगार के नाम पर ले जाए गए 12 बाल एवं किशोर श्रमिकों को कथित तौर पर बंधुआ मजदूरी जैसी परिस्थितियों से मुक्त कराया गया। इनमें पाकुड़ जिले के 10 और पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के दो बच्चे शामिल हैं। रेस्क्यू के बाद सभी बच्चों को रायगंज थाना लाया गया, जहां उनकी पहचान, आयु सत्यापन और बयान दर्ज करने सहित आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
करीब 50 बच्चों के फंसे होने की मिली थी सूचना
जानकारी के अनुसार उत्तर दिनाजपुर जिले में करीब 50 बाल एवं किशोर श्रमिकों को कथित रूप से प्रतिकूल परिस्थितियों में रखे जाने की सूचना मिली थी। इनमें अधिकांश बच्चों के पाकुड़ जिले के निवासी होने की बात सामने आई थी। सूचना के बाद संबंधित विभागों और संस्थाओं ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संयुक्त रेस्क्यू अभियान चलाया।
रोजगार का प्रलोभन देकर बाहर ले जाने का आरोप
बताया गया कि बच्चों को रोजगार का प्रलोभन देकर ठेकेदारों और बिचौलियों के माध्यम से उनके गांवों से बाहर ले जाया गया था। आरोप है कि वहां उनसे प्रतिकूल परिस्थितियों में लंबे समय तक काम कराया जा रहा था। अभियान के दौरान 12 बच्चों को वहां से मुक्त कराकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।
कई विभाग और संस्थाएं अभियान में शामिल
रेस्क्यू अभियान में उत्तर दिनाजपुर जिला प्रशासन, पाकुड़ श्रम विभाग, राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष रांची, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायगंज, रायगंज थाना पुलिस, इंटरनेशनल जस्टिस मिशन और चाइल्ड राइट्स फाउंडेशन रांची सहित अन्य संस्थाओं ने समन्वय के साथ भूमिका निभाई।
बाल कल्याण समिति करेगी आगे की कार्रवाई
रेस्क्यू किए गए बच्चों के संरक्षण और उनके सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई बाल कल्याण समिति एवं अन्य सक्षम प्राधिकारियों के स्तर से की जाएगी। बच्चों की पहचान और आयु सत्यापन की प्रक्रिया भी जारी है।
पाकुड़ के बच्चों की सुरक्षित वापसी पर जोर
पाकुड़ के 10 बच्चों की सुरक्षित वापसी और पुनर्वास को लेकर जिला प्रशासन संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर रहा है। उपायुक्त मेघा भारद्वाज ने कहा कि बच्चों का शोषण और बाल श्रम गंभीर विषय है तथा बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उन्होंने आम लोगों से अपील की कि बाल श्रम, जबरन श्रम या रोजगार के नाम पर बच्चों को बाहर ले जाने से जुड़ी किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल प्रशासन या संबंधित सक्षम प्राधिकारियों को दें। उन्होंने कहा कि बच्चों को सुरक्षित और बेहतर भविष्य देने के लिए प्रशासन के साथ समाज की सतर्कता भी जरूरी है।