
घाघरा संवाददाता, प्रेम कुमार साहू। घाघरा प्रखंड की कुहीपाट पंचायत अंतर्गत गुनिया गांव में 15वें वित्त आयोग की राशि से कराई जा रही मिट्टी-मोरम सड़क निर्माण योजना की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि सड़क निर्माण में निर्धारित मात्रा और गुणवत्ता के अनुरूप मोरम का इस्तेमाल नहीं किया गया तथा आसपास की मिट्टी डालकर कार्य पूरा करने की कोशिश की गई। ग्रामीणों ने पूरे मामले की स्थल जांच कराने की मांग की है।

ग्रामीणों के अनुसार टीरु साहू के घर से मंगा उरांव के घर तक करीब दो किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण मुखिया और पंचायत सचिव के कार्यादेश के बाद लाभुक समिति के माध्यम से कराया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि जून-जुलाई में कराए गए निर्माण के बाद पहली ही बरसात में सड़क के कई हिस्सों में कीचड़ और दलदल की स्थिति बन गई है। इससे ग्रामीणों के आवागमन में परेशानी हो रही है।
ग्रामीणों का दावा है कि योजना में करीब दो लाख रुपये की राशि का भुगतान किया जा चुका है। हालांकि पंचायत सचिव वीरेंद्र साहू ने दूरभाष पर बताया कि अब तक एक लाख रुपये का ही भुगतान हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि ऑनलाइन भुगतान संबंधी विवरण में करीब दो लाख रुपये की राशि दिखाई दे रही है। ऐसे में ग्रामीणों ने योजना के भुगतान और अभिलेखों की जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीणों ने योजना के एमबी (मेजरमेंट बुक) को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कनीय अभियंता द्वारा कार्य का माप दर्ज किए जाने के बाद भुगतान किया गया, तो मौके पर सड़क की गुणवत्ता और निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की जांच किस स्तर पर हुई। ग्रामीणों ने प्रखंड स्तर पर योजना की निगरानी को लेकर भी सवाल उठाते हुए संबंधित अधिकारियों से जांच की मांग की है।
ग्रामीणों के अनुसार उक्त सड़क गांव के लिए महत्वपूर्ण है। इस रास्ते से गुमला जाने में कम दूरी तय करनी पड़ती है। सड़क खराब होने के कारण मरीजों, गर्भवती महिलाओं और प्रसव पीड़ितों को अस्पताल पहुंचाने में परेशानी होती है। ग्रामीणों का कहना है कि झीलगी से बोहकर मुख्य पथ तक मरीजों को ले जाना पड़ता है। एंबुलेंस सहित अन्य वाहन भी कई बार गांव तक नहीं पहुंच पाते। वहीं, स्कूली बच्चों को भी आवागमन में परेशानी होती है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से सड़क निर्माण की स्थल जांच, एमबी, भुगतान संबंधी अभिलेख और निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच के बाद ही योजना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
संबंधित पक्षों ने क्या कहा
पंचायत सचिव वीरेंद्र साहू ने बताया कि योजना में अब तक एक लाख रुपये का भुगतान हुआ है।
मुखिया फागुवा उरांव ने कहा कि सड़क निर्माण में मोरम की कमी रह गई है। उन्होंने लाभुक समिति को काम बेहतर तरीके से पूरा करने को कहा है।
कनीय अभियंता जीवन एक्का ने कहा कि मोरम की कमी की शिकायत मिली है। उनके अनुसार पहले कराया गया काम ठीक था, लेकिन पानी के कारण सड़क खराब हो गई। उन्होंने कहा कि सड़क का काम पूरा कराया जाएगा।
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