लातेहार।सरस्वती विद्या मंदिर, धर्मपुर पथ, लातेहार में शुक्रवार को शिक्षा, संस्कार और विज्ञान को केंद्र में रखकर दो अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए गए। विद्यालय में जहां वाटिका खंड की मासिक ई-पत्रिका ‘नन्हे कदम’ का लोकार्पण किया गया, वहीं राष्ट्रीय विज्ञान सप्ताह के सातवें दिन विद्यार्थियों को भारतीय वैज्ञानिकों और देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम की गौरवशाली यात्रा से परिचित कराया गया।
ई-पत्रिका ‘नन्हे कदम’ का विमोचन मातृ भारती की अध्यक्ष श्रीमती रितु रानी पाण्डेय, वाटिका प्रमुख श्रीमती गीता कुमारी तथा वाटिका आचार्या सुश्री शिल्पा कुमारी ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम में विद्यालय परिवार और मातृ भारती के सदस्यों की उपस्थिति रही।
प्रधानाचार्य श्री उत्तम कुमार मुखर्जी ने कहा कि यह ई-पत्रिका वाटिका के विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा, संस्कारमूलक गतिविधियों और सीखने की प्रक्रिया का दस्तावेज है। इससे बच्चों को अपनी अभिव्यक्ति का अवसर मिलता है और विद्यालय की गतिविधियां समाज तक पहुंचती हैं।
अतिथियों ने भी पत्रिका की सराहना करते हुए कहा कि यह विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ उनकी सृजनात्मक सोच को आगे बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है।
दूसरे सत्र में राष्ट्रीय विज्ञान सप्ताह के तहत भारतीय वैज्ञानिकों के जीवन और उपलब्धियों पर आधारित कार्यक्रम आयोजित किया गया। बहन रुचि कुमारी ने डॉ. होमी जहांगीर भाभा के योगदान पर विचार रखे, जबकि बहन आराध्या सिंह ने जगदीश चंद्र बसु के वैज्ञानिक कार्यों से विद्यार्थियों को परिचित कराया। आचार्या सुश्री नीलम कुमारी ने प्रसिद्ध वैज्ञानिक आशिमा चटर्जी के शोध कार्यों की जानकारी दी।
विद्यार्थियों को इसरो की स्थापना से लेकर चंद्रयान मिशन तक की उपलब्धियों के बारे में बताया गया। साथ ही भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के जीवन और कार्यों पर भी प्रकाश डाला गया।
कार्यक्रम के दौरान “साइकिल से रॉकेट तक और फिर चाँद तक का सफर” विषय पर आधारित डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई। इसके माध्यम से विद्यार्थियों ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के संघर्ष, विकास और सफलताओं को जाना तथा विज्ञान के प्रति उनकी जिज्ञासा और रुचि बढ़ी।
इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पलामू विभाग के पर्यावरण प्रमुख श्री धर्मेन्द्र जायसवाल उपस्थित रहे।
समापन पर प्रधानाचार्य श्री उत्तम कुमार मुखर्जी ने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने के साथ उन्हें नवाचार और शोध के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से महान वैज्ञानिकों के आदर्शों का अनुसरण करते हुए ज्ञान और विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने का आह्वान किया।