- महिला सुरक्षा, सशक्तिकरण और सम्मान पर हुआ व्यापक मंथन, 1000 प्रतिभागियों की सहभागिता
पाकुड़।
सोमवार को मिशन शक्ति के अंतर्गत महिलाओं को सुरक्षित, सशक्त एवं सम्मानित अधिकार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन, पाकुड़ के तत्वावधान में अनुमंडल स्तरीय एक दिवसीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला का भव्य आयोजन पुराना समाहरणालय परिसर में किया गया।
कार्यशाला का शुभारंभ परियोजना निदेशक आईटीडीए अरुण कुमार एक्का, अपर समाहर्ता जेम्स सुरीन, अनुमंडल पदाधिकारी साईमन मरांडी, डालसा सचिव सह न्यायाधीश रुपा वंदना कीरो, जिला परिषद उपाध्यक्ष अशोक कुमार भगत, सिविल सर्जन डॉ. सुरेन्द्र कुमार मिश्रा, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी बसंती ग्लाडिस बाड़ा सहित अन्य पदाधिकारियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।
कार्यशाला में विभिन्न विभागों के पदाधिकारी, धर्मगुरु, ग्राम प्रधान, संस्थागत प्रतिनिधि एवं समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े लगभग 1000 प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई।
महिला सुरक्षा एवं सामाजिक कुरीतियों पर विस्तृत चर्चा
कार्यक्रम के दौरान घरेलू हिंसा, भ्रूण हत्या, दहेज प्रथा, डायन कुप्रथा, बाल विवाह, नशा मुक्ति एवं अन्य सामाजिक कुरीतियों पर विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही मुख्यमंत्री मंईया सम्मान योजना, सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, विधवा पुनर्विवाह प्रोत्साहन योजना, दिव्यांग छात्रवृत्ति योजना सहित मिशन शक्ति की विभिन्न योजनाओं के उद्देश्यों व लाभों से प्रतिभागियों को अवगत कराया गया।
इस अवसर पर रानी विद्यालय की छात्राओं द्वारा नुक्कड़ नाटक के माध्यम से बाल विवाह के दुष्परिणामों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत कर समाज को जागरूक करने का संदेश दिया गया।
समाज की सोच बदले बिना बदलाव संभव नहीं : जिला समाज कल्याण पदाधिकारी
जिला समाज कल्याण पदाधिकारी बसंती ग्लाडिस बाड़ा ने कहा कि जब बेटियों को बोझ समझा जाता है, बच्चों को शिक्षा से वंचित रखा जाता है और नशे की लत परिवारों को तोड़ती है, तब समाज प्रगति नहीं कर सकता। उन्होंने डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम, बाल विवाह निषेध अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम एवं दहेज निषेध अधिनियम का उल्लेख करते हुए समाज की सामूहिक भागीदारी पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि “कोई भी सपना जादू से नहीं, बल्कि मेहनत और दृढ़ संकल्प से साकार होता है।” साथ ही पलायन और मानव तस्करी पर चिंता व्यक्त करते हुए कुरीति-मुक्त समाज की आवश्यकता बताई।
सामूहिक प्रयास से ही सामाजिक कुरीति मुक्त झारखंड संभव : उपायुक्त
उपायुक्त मनीष कुमार ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि जिला प्रशासन द्वारा प्रोजेक्ट चेंज सहित विभिन्न अभियानों के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन हेतु निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने एनीमिया मुक्त, नशा मुक्त और कुरीति मुक्त झारखंड के निर्माण में सभी की सहभागिता को आवश्यक बताया।
बाल विवाह पर गंभीर चिंता
समाज कल्याण निदेशालय के कंसल्टेंट ने बताया कि यदि बाल विवाह की दर 32 प्रतिशत है, तो यह गंभीर आत्ममंथन का विषय है। उन्होंने 18 वर्ष से कम आयु में विवाह की सूचना चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 और महिला उत्पीड़न/डायन प्रथा से संबंधित मामलों की सूचना महिला हेल्पलाइन 181 पर देने की अपील की।
जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार : अनुमंडल पदाधिकारी
अनुमंडल पदाधिकारी साईमन मरांडी ने कहा कि सामाजिक कुरीतियों की रोकथाम के लिए जागरूकता सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने आंगनबाड़ी सेविकाओं, स्वयं सहायता समूहों, विद्यालय प्रबंधन समितियों और मीडिया की सक्रिय भूमिका पर जोर दिया।
निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध : डालसा सचिव
डालसा सचिव सह न्यायाधीश सुश्री रुपा वंदना कीरो ने बताया कि बाल विवाह, डायन प्रथा एवं महिला उत्पीड़न के मामलों में पीड़ितों को निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
डायन कुप्रथा उन्मूलन एवं बाल विवाह मुक्त झारखंड की शपथ
परियोजना निदेशक आईटीडीए अरुण कुमार एक्का ने उपस्थित सभी पदाधिकारियों एवं कर्मियों को डायन कुप्रथा उन्मूलन एवं बाल विवाह मुक्त झारखंड के लिए शपथ दिलाई।