विजयपुर रेलवे पुल पर रास्ता बंद होने के खिलाफ किसानों का हस्ताक्षर अभियान, सैकड़ों ग्रामीणों ने जताया विरोध
किसान अधिकार संघर्ष समिति के बैनर तले चला अभियान, रेल मंत्री को सामूहिक ज्ञापन भेजकर सुरक्षित वैकल्पिक रास्ते की करेंगे मांग

रिपोर्ट केशव तिवारी ब्योरो संवाददाता।
कोटालपोखर । विजयपुर गांव स्थित रेलवे पुल संख्या 256 पर रास्ता बंद किए जाने से उत्पन्न आवागमन की समस्या को लेकर किसान व ग्रामीणों का मामला तुल पकड़ने लगा है । शुक्रवार को विजयपुर गांव में किसान अधिकार संघर्ष समिति के बैनर तले हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। अभियान में सैकड़ों ग्रामीणों एवं किसानों ने उत्साह साथ भाग लेकर अपनी मांगों के समर्थन में हस्ताक्षर किये।
ग्रामीणों का कहना है कि रेलवे प्रशासन द्वारा विजयपुर रेलवे पुल पर लोहे के स्लीपर लगाकर रास्ता बंद कर दिए जाने से आसपास के सात गांवों के हजारों किसानों आवागमन प्रभावित हो गया है। वर्षों से ग्रामीण इस मार्ग से आवागमन के साथ-साथ खेत धान की फसल ढलाई कार्य करते आ रहे थे। रास्ता बंद होने से किसानों को खेतों तक पहुंचने और कृषि उपज को खलिहान तक लाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

सबसे अधिक परेशानी इस समय धान कटनी के मौसम में किसानों को हो रही है। ग्रामीणों के अनुसार, पहले जिस रास्ते से बैलगाड़ी एवं छोटे वाहनों के माध्यम से आसानी से कृषि उपज का परिवहन किया जाता था, उसके बंद होने से अब किसानों को करीब 20 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा है। इससे समय, श्रम और आर्थिक खर्च में बढ़ोतरी हो रही है।
हस्ताक्षर अभियान के दौरान ग्रामीणों ने एकजुट होकर निर्णय लिया कि इस गंभीर समस्या को केंद्रीय रेल मंत्रालय तक पहुंचाया जाएगा। इसके लिए हस्ताक्षरयुक्त सामूहिक ज्ञापन केंद्रीय रेल मंत्री को भेजा जाएगा। साथ ही रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष, पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक, हावड़ा मंडल के मंडल रेल प्रबंधक, साहिबगंज के उपायुक्त, राजमहल के अनुमंडल पदाधिकारी एवं कोटालपोखर स्टेशन प्रबंधक को भी ज्ञापन की प्रतिलिपि भेजने की तैयारी की जा रही है।
किसान अधिकार संघर्ष समिति के माध्यम से ग्रामीणों ने मांग की है कि रेलवे प्रशासन के अधिकारी प्रभावित गांवों का स्थलीय निरीक्षण करें और रेलवे सुरक्षा मानकों के अनुरूप सुरक्षित वैकल्पिक रास्ते की व्यवस्था सुनिश्चित करें। ग्रामीण चाहते हैं कि बैलगाड़ी, कृषि वाहनों एवं छोटे वाहनों के आवागमन के लिए स्थायी समाधान निकाला जाए, ताकि किसानों और आम लोगों को राहत मिल सके।
अभियान मयूरकोला, दुखियाटोला, ढाटा पारा, पथरिया, बड़ासोनाकड, विजयपुर, मुसहरी टोला, भदईटाड़ एवं फुलचुवा सहित आसपास गांव के प्रभावित क्षेत्रों के किसान व ग्रामीणों की भागीदारी रही।
![]()




