राजमहल का झुमझुमिया काली मंदिर: रेलवे ट्रैक पर मिली थी शिला, अंग्रेज अधिकारी की मौत की है रहस्यमयी कहानी
रेलवे ट्रैक पर मिली थी विशाल शिला, तोड़ने की कोशिश में निकला खून! अंग्रेज अधिकारी की मौत से जुड़ी है झुमझुमिया काली मंदिर की रहस्यमयी कहानी

रिपोर्ट : निशांत कुमार सानू,
राजमहल। रेलवे ट्रैक पर मिली एक विशाल शिला, उसे तोड़ने की कोशिश में खून निकलने की मान्यता और गोली चलाने वाले अंग्रेज अधिकारी की मौत! राजमहल रेलवे स्टेशन के समीप स्थित झुमझुमिया काली मंदिर की कहानी आज भी लोगों के बीच कौतूहल और आस्था का विषय बनी हुई है। ब्रिटिश काल से जुड़ी इस रहस्यमयी घटना की चर्चा आज भी स्थानीय लोगों की जुबान पर है। पत्थर के रूप में विराजमान मां काली के दर्शन के लिए प्रतिदिन श्रद्धालुओं का तांता लगता है।
रेलवे पटरी के बीच मिली थी विशाल शिला, हटाने में नाकाम रहे मजदूर
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, ब्रिटिश शासनकाल में खाना जंक्शन से राजमहल रेलवे स्टेशन तक रेल लाइन बिछाने का कार्य चल रहा था। इसी दौरान रेलवे पटरी के बीच एक विशाल पत्थर मिला। मजदूरों ने शिला को हटाने के लिए काफी मशक्कत की, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उसे हटाया नहीं जा सका। इसके बाद एक अंग्रेज अधिकारी के आदेश पर शिला को तोड़ने का प्रयास किया गया।
बताया जाता है कि जैसे ही पत्थर पर चोट की गयी, उसमें से खून निकलने लगा। इसके बाद वहां मां काली के स्वरूप की पूजा करने की आवाज सुनाई देने की मान्यता है। स्थानीय किंवदंती के अनुसार, इस घटना से गुस्साए अंग्रेज अधिकारी ने शिला पर पिस्तौल से दो गोलियां चला दीं। इसके बाद अधिकारी की मौके पर ही मौत हो गयी। इस घटना ने शिला को लेकर लोगों की आस्था को और गहरा कर दिया। तभी से यहां मां काली की पूजा-अर्चना शुरू होने की मान्यता है।

मौसी के बाद पुजारिन बेला रानी संभाल रहीं मां की सेवा
मंदिर की पुजारिन बेला रानी पांडेय ने बताया कि पहले उनकी मौसी बिनोदा देवी यहां पूजा-अर्चना करती थीं। उनके निधन के बाद से वह स्वयं मां काली की सेवा में जुटी हैं। उन्होंने बताया कि कथित घटना के कुछ दिनों बाद अंग्रेज अधिकारी के परिजन अपने बच्चों के साथ मंदिर पहुंचे थे। उन्होंने शिला पर चादर चढ़ायी थी। इसके बाद मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने लगी और पूजा-अर्चना का सिलसिला निरंतर जारी हो गया।
शिला पर आज भी गोली के निशान होने का दावा, मन्नत लेकर पहुंचते हैं भक्त
स्थानीय लोगों का दावा है कि शिला पर अंग्रेज अधिकारी द्वारा चलाई गयी गोलियों के निशान आज भी मौजूद हैं। मंदिर से जुड़ी यह कहानी जहां लोगों के लिए रहस्य का विषय है, वहीं श्रद्धालुओं के लिए मां काली की अटूट शक्ति और आस्था का प्रतीक बनी हुई है।
मान्यता है कि मां काली के दरबार में सच्चे मन से मांगी गयी मन्नत अवश्य पूरी होती है। इसी विश्वास के साथ राजमहल सहित आसपास के क्षेत्रों से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। वर्षों से चली आ रही पूजा परंपरा ने झुमझुमिया काली मंदिर को क्षेत्र के प्रमुख आस्था केंद्रों में स्थापित कर दिया है।
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