पाकुड़-गुमानी रेलखंड पर चेन पुलिंग करने वालों पर RPF का शिकंजा, पांच महीने में 39 गिरफ्तार
बेवजह ट्रेन रोकने वालों की अब खैर नहीं! रेल परिचालन बाधित करने पर रेलवे अधिनियम के तहत कार्रवाई, गावों में भी चल रहा जागरूकता अभियान

निशांत कुमार सानू की रिपोर्ट,
पाकुड़ संवाददाता। ट्रेन की चेन खींचकर रेल परिचालन बाधित करना अब महंगा पड़ रहा है. पाकुड़-गुमानी रेलखंड पर अनावश्यक चेन पुलिंग करने वालों के खिलाफ रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है. मई से अब तक महज पांच महीने में चेन पुलिंग के 39 मामले सामने आये हैं, जिनमें 39 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. सभी आरोपितों के खिलाफ रेलवे अधिनियम के तहत कार्रवाई की गयी है. आरपीएफ की लगातार कार्रवाई से रेल परिचालन में बाधा डालने वालों पर शिकंजा कसता जा रहा है.

पांच महीने में 39 गिरफ्तार, चेन पुलिंग करने वालों पर सीधी कार्रवाई
आरपीएफ के सब इंस्पेक्टर प्रभाकर चौधरी ने बताया कि रेल परिचालन को सुरक्षित, सुचारु और समयबद्ध बनाए रखने के लिए आरपीएफ की टीम लगातार सक्रिय है. पाकुड़-गुमानी रेलखंड पर चेन पुलिंग की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए आरोपितों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है. उन्होंने कहा कि ट्रेन को बेवजह रोककर यात्रियों की परेशानी बढ़ाने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जायेगा.
जागरूकता के बावजूद हरकतों से बाज नहीं आ रहे उपद्रवी
चेन पुलिंग की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए आरपीएफ रेलखंड से सटे ग्रामीण इलाकों में प्रतिदिन जागरूकता अभियान चला रही है. लोगों को अनावश्यक रूप से अलार्म चेन खींचने के दुष्परिणामों से अवगत कराया जा रहा है. इसके बावजूद कुछ उपद्रवी तत्व अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं. ऐसे लोगों पर आरपीएफ की पैनी नजर है. रेल परिचालन में जानबूझकर व्यवधान उत्पन्न करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई जारी रहेगी.
एक ट्रेन रुकने से बिगड़ता है कई ट्रेनों का टाइम-टेबल
अनावश्यक चेन पुलिंग का असर केवल एक ट्रेन तक सीमित नहीं रहता. इससे संबंधित ट्रेन की गति थमने के साथ पीछे चल रही दूसरी ट्रेनों का परिचालन भी प्रभावित होता है. नतीजतन यात्रियों को घंटों तक परेशानी झेलनी पड़ सकती है और रेलवे की समयबद्धता पर भी असर पड़ता है.
आरपीएफ ने यात्रियों से अपील की है कि अलार्म चेन का इस्तेमाल केवल वास्तविक आपातकालीन स्थिति में ही करें. बिना उचित कारण ट्रेन रोकना रेलवे अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है. यात्रियों की सुरक्षा और सुगम रेल यात्रा सुनिश्चित करने के लिए आरपीएफ का निगरानी अभियान आगे भी जारी रहेगा.
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