6 की थाप पर झूमेंगे आदिवासी समूह, पूजा-अर्चना के साथ शुरू होगा ऐतिहासिक मेला
Pakud News

बरहरवा। : सदियों पुरानी लोक परंपरा, आस्था और आदिवासी संस्कृति का अनूठा संगम मंगलवार को बरहरवा के रतनपुर स्थित छाता डंगाल मैदान में देखने को मिलेगा। यहां पारंपरिक छाता डंगाल मेला सजेगा। मेले में बरहरवा Cctv आसपास के प्रखंडों और सीमावर्ती इलाकों से हजारों लोगों के पहुंचने की संभावना है। मेला परिसर में दुकानें, झूले और मनोरंजन के साधन सजकर तैयार हैं, वहीं आदिवासी समूहों के पारंपरिक रुमुक को लेकर भी खास उत्साह है।
जीतिया के बाद मेले की परंपरा,8 आस्था से जुड़ा आयोजन
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, जीतिया पर्व के बाद मंगलवार या शुक्रवार को छाता डंगाल मैदान में मेला लगाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। यह आयोजन सिर्फ मनोरंजन और खरीदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि आदिवासी समाज की आस्था, संस्कृति और लोक परंपराओं की पहचान भी है। भगवान सूर्य की उपासना का इस आयोजन में विशेष महत्व माना जाता है।
मेले की शुरुआत से पहले स्थानीय पुरोहित द्वारा छाता डंगाल मैदान में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। पूजा के बाद मेला शुरू होता है और देखते ही देखते मैदान लोगों की भीड़ से गुलजार हो जाता है।

बांस पर सजा छाता,मेसबसे बड़ी पहचान
छाता डंगाल मेले की खास पहचान बांस के ऊपरी हिस्से में बांधा जाने वाला पारंपरिक छाता है। इसी छाते के नाम से यह पूरा आयोजन प्रसिद्ध है। समय के साथ मेले का स्वरूप भले बदला हो, लेकिन छाता लगाने, पूजा करने और पारंपरिक आयोजन की मूल परंपरा आज भी कायम है।
रुमुक की थाप पर दिखेगा आदिवासी संस्कृति का रंग
मेले का सबसे बड़ा आकर्षण आदिवासी सांस्कृतिक समूहों का पारंपरिक रुमुक होगा। आसपास के गांवों से आदिवासी समूह हाथों में लाठी, टहनी और पौधे लेकर मेले में पहुंचेंगे। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन पर सामूहिक रूप से झूमते और नृत्य करते समूह मेले के माहौल को पूरी तरह लोक संस्कृति के रंग में रंग देंगे।
स्थानीय स्तर पर इस सामूहिक झूमने को टैनी या झूमना कहा जाता है, जबकि आदिवासी भाषा में इसे रुमुक कहा जाता है। समूहों का पारंपरिक अंदाज में नृत्य और वाद्ययंत्रों की धुन मेले में आने वाले लोगों के लिए खास आकर्षण रहेगी।
झूले, मिठाई और खिलौनों की दुकानें भी रहेंगी आकर्षण
मेले में बच्चों और युवाओं के लिए विभिन्न प्रकार के झूले लगाए जाएंगे। वहीं मिठाई, नाश्ता, खिलौने, मनिहारी और घरेलू उपयोग की वस्तुओं की दुकानें भी सजेंगी। आसपास के ग्रामीणों के लिए छाता डंगाल मेला खरीदारी के साथ मनोरंजन और आपसी मेल-मिलाप का भी बड़ा अवसर होता है।
भीड़ को देखते हुए पुलिस रहेगी अलर्ट
मेला समिति के अध्यक्ष विष्णु साह ने बताया कि आयोजन को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं। लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मेला परिसर में आवश्यक व्यवस्थाएं की गयी हैं।
इधर, हजारों लोगों की संभावित भीड़ को देखते हुए बरहरवा और रांगा थाना पुलिस भी अलर्ट रहेगी। मेला परिसर और आसपास के इलाकों में पुलिस की निगरानी रहेगी। भीड़ नियंत्रण और विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक पुलिस व्यवस्था की गयी है।
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