नई दिल्ली

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026: वैश्विक विशेषज्ञों ने एआई रणनीति, बुनियादी ढांचे और नियमन पर की चर्चा

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026: वैश्विक विशेषज्ञों ने एआई रणनीति, बुनियादी ढांचे और नियमन पर की चर्चा

नई दिल्ली।इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के एक उच्च स्तरीय पैनल सत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के प्रसार, राष्ट्रीय रणनीतियों, बुनियादी ढांचे, नवाचार तथा वैश्विक सहयोग और विनियमन की बदलती संरचना पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। सत्र में विभिन्न देशों के नीति निर्माताओं और तकनीकी विशेषज्ञों ने भाग लेते हुए एआई को सुरक्षित, समावेशी और मानव-केंद्रित बनाने पर जोर दिया।

पैनल में कोस्टा रिका की विज्ञान, नवाचार, प्रौद्योगिकी एवं दूरसंचार मंत्री पाउला बोगेंटेस ज़मोरा, संयुक्त अरब अमीरात के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल अर्थव्यवस्था और दूरस्थ कार्य अनुप्रयोगों के राज्य मंत्री उमर अल ओलामा, व्हाइट हाउस में एआई के वरिष्ठ नीति सलाहकार श्रीराम कृष्णन और ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के अध्यक्ष समीर सरन शामिल रहे।

श्रीराम कृष्णन ने संयुक्त राज्य अमेरिका की एआई प्राथमिकताओं को तीन प्रमुख स्तंभों—विश्व स्तरीय एआई अवसंरचना, नवाचार को प्रोत्साहन और सहयोगी देशों के साथ साझेदारी—पर आधारित बताया। उन्होंने डेटा सेंटर क्षमता और कंप्यूटिंग अवसंरचना के विस्तार की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि लागत वहनीय रखने और ऊर्जा स्थिरता सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने नियामक स्पष्टता, बौद्धिक संपदा संरक्षण, बाल सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की बात कही।

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026: वैश्विक विशेषज्ञों ने एआई रणनीति, बुनियादी ढांचे और नियमन पर की चर्चा

उमर अल ओलामा ने संयुक्त अरब अमीरात के अनुभव साझा करते हुए कहा कि एआई का उद्देश्य जीवन की गुणवत्ता में सुधार और समाज के हर वर्ग तक तकनीक की पहुंच सुनिश्चित करना होना चाहिए। उन्होंने एआई साक्षरता, जिम्मेदार उपयोग और वैश्विक संवाद के महत्व को रेखांकित किया तथा अचानक कठोर नियामकीय बदलावों से बचने की सलाह दी। उनके अनुसार तकनीक के साथ विकसित होने वाले लचीले और क्रमिक नियामक ढांचे नवाचार और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखते हैं।

पाउला बोगेंटेस ज़मोरा ने छोटे और विकासशील देशों के दृष्टिकोण को सामने रखते हुए कहा कि एआई देशों को अपनी डिजिटल तैयारियों का वास्तविक आकलन करने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने 5-जी कनेक्टिविटी, डेटा गवर्नेंस, राष्ट्रीय एआई रणनीति और अनुसंधान में निवेश को आधारभूत आवश्यकताएं बताया। उन्होंने कहा कि विनियमन प्रत्येक देश के विकास स्तर के अनुरूप होना चाहिए और क्षेत्रीय सहयोग से विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की आवाज मजबूत हो सकती है।

डॉ. समीर सरन ने अपने संचालन वक्तव्य में एआई के प्रभाव, प्रसार और बहुपक्षीय सहयोग पर चर्चा को केंद्रित किया। उन्होंने कहा कि तेजी से विकसित हो रही तकनीक के दौर में नवाचार और संयम के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। मानव-केंद्रित डिजाइन, सुरक्षा दिशानिर्देश और मूल्यों पर आधारित साझेदारियां एआई सुशासन को अधिक समावेशी बना सकती हैं।

सत्र के अंत में वक्ताओं ने माना कि एआई आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति और जीवन की गुणवत्ता सुधारने का बड़ा अवसर प्रदान करता है। उन्होंने बुनियादी ढांचे में निवेश, नवाचार को बढ़ावा, जिम्मेदार नियमन और वैश्विक सहयोग को एआई के व्यापक लाभ सुनिश्चित करने के प्रमुख कारक बताया।

इस चर्चा ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 सुरक्षित, समावेशी और भविष्य-उन्मुख आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सुशासन को आकार देने वाला एक महत्वपूर्ण वैश्विक मंच बन चुका है।

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