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पेटरवार-कसमार को मिलेगा नया फोरलेन कॉरिडोर?

पेटरवार-कसमार को मिलेगा नया फोरलेन कॉरिडोर?

झारखंड में प्रस्तावित नॉर्थ-साउथ फोरलेन कॉरिडोर, डीपीआर चरण में योजना

झारखंड में उत्तर से दक्षिण दिशा में सड़क कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से प्रस्तावित नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज है. यह कॉरिडोर झुमरीतिलैया (कोडरमा) से शुरू होकर बिष्णुगढ़, पेटरवार, कसमार, बरलंगा, सिल्ली, सरायकेला और चाईबासा होते हुए जैतगढ़ (ओडिशा सीमा) तक जाने का प्रस्ताव है. इसकी कुल अनुमानित लंबाई लगभग 275 किलोमीटर बताई जा रही है.
नीति आयोग एवं झारखंड सरकार से जुड़े आधारभूत संरचना दस्तावेजों के अनुसार, यह परियोजना झारखंड में प्रस्तावित छह प्रमुख फोर-लेन कॉरिडोरों में शामिल है, जिनका उद्देश्य राज्य के भीतर लंबी दूरी की आवाजाही को तेज करना और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है.


इंडिया इन्फ्रा हब और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर विश्लेषण मंचों के अनुसार, यह कॉरिडोर फिलहाल डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) की तैयारी/योजना चरण में है और इसके निर्माण की औपचारिक शुरुआत की कोई अधिसूचना अभी तक जारी नहीं हुई है.


विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह कॉरिडोर मूर्त रूप लेता है, तो पेटरवार-कसमार जैसे कृषि एवं औद्योगिक संभावनाओं वाले क्षेत्रों को बड़ा लाभ मिलेगा. इससे माल ढुलाई, स्थानीय बाजार, पर्यटन और रोजगार के अवसरों में वृद्धि संभव है.


हालांकि, सोशल मीडिया पर इसे कई जगह ‘अंतरराष्ट्रीय स्तर का फोरलेन कॉरिडोर’ और ‘पूरी तरह भारतमाला परियोजना के तहत स्वीकृत’ बताकर प्रचारित किया जा रहा है, जबकि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सरकारी दस्तावेजों में फिलहाल इसे प्रस्तावित राज्य स्तरीय कॉरिडोर के रूप में ही दर्शाया गया है, न कि पूर्ण स्वीकृत भारतमाला पैकेज के रूप में.


सड़क निर्माण से जुड़े जानकारों का कहना है कि डीपीआर, भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय स्वीकृति और वित्तीय मंजूरी जैसे चरण पूरे होने के बाद ही निर्माण की वास्तविक तस्वीर साफ होगी.
फिलहाल यह परियोजना संभावनाओं की श्रेणी में है, लेकिन यदि इसे स्वीकृति मिलती है तो यह झारखंड की आंतरिक कनेक्टिविटी के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है.

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