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बरहरवा रेल पुलिस की बड़ी सफलता: बांग्लादेश से जुड़े जाली नोट नेटवर्क का भंडाफोड़

बरहरवा रेल पुलिस की बड़ी सफलता: बांग्लादेश से जुड़े जाली नोट नेटवर्क का भंडाफोड़

बरहरवा।
साहिबगंज जिले की बरहरवा रेल पुलिस ने जाली नोट तस्करी के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश कर एक बड़ी सफलता हासिल की है। इस मामले में पुलिस ने शुक्रवार को गिरोह के एक प्रमुख सदस्य रंजन मंडल को पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के वैष्णव नगर थाना क्षेत्र स्थित हटकपाड़ा गांव से गिरफ्तार किया। यह गांव भारत-बांग्लादेश सीमा से महज दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

रंजन मंडल से बरामद हुए जाली नोट

पुलिस ने छापेमारी के दौरान रंजन मंडल के घर से 500 रुपये मूल्य के जाली नोटों में कुल 5,000 रुपये जब्त किए। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह गिरोह बांग्लादेश से नकली नोट मंगाकर भारत के विभिन्न राज्यों में सप्लाई करता था। रंजन मंडल इस पूरे नेटवर्क की अहम कड़ी बताया जा रहा है।

रेलवे स्टेशन से हुई थी शुरुआत

गौरतलब है कि 13 अप्रैल 2025 को बरहरवा रेलवे स्टेशन पर जीआरपी और आरपीएफ की संयुक्त टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई की थी। मुख्य गेट के पास संदिग्ध हालत में घूम रहे दो युवकों को हिरासत में लिया गया। पूछताछ और तलाशी में उनके पास से भारी मात्रा में जाली नोट बरामद हुए।

गिरफ्तार युवकों की पहचान लुधियाना (पंजाब) निवासी तीर्थ सिंह और इंद्रप्रीत सिंह के रूप में हुई। तलाशी में तीर्थ सिंह के बैग से ₹2.14 लाख, जबकि इंद्रप्रीत सिंह के बैग से ₹1.98 लाख के जाली नोट मिले। प्रारंभिक पूछताछ में दोनों ने नेटवर्क से जुड़े कई राज खोले और पुलिस को मिर्जापुर नयन टोला (बरहरवा) निवासी कालू घोष का नाम बताया।

एक-एक कर खुला गिरोह का नेटवर्क

पुलिस ने तत्काल कार्रवाई कर कालू घोष को हिरासत में लिया। आगे की जांच में फरक्का एनटीपीसी मोड़ निवासी पिप्ला घोष उर्फ विप्लव घोष का नाम सामने आया। पुलिस ने कई बार उसके घर दबिश दी और इश्तिहार चिपकाए। बढ़ते दबाव में आकर विप्लव घोष ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। रिमांड पर पूछताछ के दौरान इस नेटवर्क के मुख्य संचालक रंजन मंडल का नाम सामने आया।

इसके बाद जीआरपी इंस्पेक्टर प्रवीण कुमार झा के नेतृत्व में बरहरवा जीआरपी थाना प्रभारी रामाशंकर प्रसाद, एसआई अरुण कुमार और कांस्टेबल चंपई सोरेन की टीम ने गुरुवार देर रात मालदा जिले में छापेमारी कर रंजन मंडल को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया।

कैसे काम करता था जाली नोट का नेटवर्क

पुलिस सूत्रों के अनुसार, बांग्लादेश में बैठे मास्टरमाइंड से नकली नोटों की पहली खेप सीधे रंजन मंडल तक पहुंचती थी। इसके बाद वह इन्हें भारत में फैले एजेंटों तक पहुँचाता था।

  • रंजन मंडल एजेंटों को 1 लाख रुपये के जाली नोट के बदले 33 हजार असली रुपये में सप्लाई करता था।
  • इसमें से 3 हजार रुपये उसका कमीशन होता था, जबकि शेष 30 हजार रुपये बांग्लादेश भेज दिए जाते थे।
  • इसी तरह, विप्लव घोष को भी 1 लाख की सप्लाई पर 4 हजार रुपये का कमीशन मिलता था।

यह नेटवर्क केवल सीमावर्ती इलाकों तक ही सीमित नहीं था, बल्कि इसकी जड़ें बिहार, झारखंड, पंजाब, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा जैसे राज्यों तक फैली हुई थीं।

असली और नकली में फर्क करना मुश्किल

पुलिस का कहना है कि जब्त किए गए जाली नोट इतने बारीकी से बनाए गए हैं कि आम लोगों के लिए असली और नकली में फर्क करना बेहद कठिन है। यही कारण है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और बड़ी मात्रा में नकली नोट देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुँचाए जा चुके थे।

अन्य आपराधिक गतिविधियों में भी उपयोग

जांच से यह भी खुलासा हुआ है कि यह नेटवर्क केवल नकली करेंसी सप्लाई तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका उपयोग हवाला कारोबार और अन्य आपराधिक गतिविधियों में भी किया जाता था। पुलिस की विशेष टीम अब इस गिरोह के आर्थिक स्रोत और इससे जुड़े अन्य एजेंटों की पहचान में जुटी है।

पुलिस का बयान

बरहरवा जीआरपी थाना प्रभारी रामाशंकर प्रसाद ने बताया कि जाली नोट मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। तलाशी में 500 रुपये मूल्य के ₹5,000 के जाली नोट बरामद किए गए हैं। उन्होंने कहा कि मामले की गहन जांच जारी है और जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया जाएगा।

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