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उपायुक्त की अध्यक्षता में यूनिसेफ एवं सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ समन्वय बैठक आयोजित

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उपायुक्त की अध्यक्षता में यूनिसेफ एवं सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ समन्वय बैठक आयोजित

पलामू:- पलामू उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी दिलीप प्रताप सिंह शेखावत की अध्यक्षता में समाहरणालय स्थित कार्यालय कक्ष में यूनिसेफ इंडिया कंट्री ऑफिस, यूनिसेफ झारखंड एवं यूनिसेफ की सहयोगी संस्था पीसीआई (PCI) के प्रतिनिधियों के साथ एक समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले में बाल संरक्षण, बाल विवाह की रोकथाम, बाल श्रम उन्मूलन तथा किशोर-किशोरियों के…

उपायुक्त की अध्यक्षता में यूनिसेफ एवं सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ समन्वय बैठक आयोजित
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उपायुक्त की अध्यक्षता में यूनिसेफ एवं सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ समन्वय बैठक आयोजित

पलामू:- पलामू उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी दिलीप प्रताप सिंह शेखावत की अध्यक्षता में समाहरणालय स्थित कार्यालय कक्ष में यूनिसेफ इंडिया कंट्री ऑफिस, यूनिसेफ झारखंड एवं यूनिसेफ की सहयोगी संस्था पीसीआई (PCI) के प्रतिनिधियों के साथ एक समन्वय बैठक आयोजित की गई।

बैठक में जिले में बाल संरक्षण, बाल विवाह की रोकथाम, बाल श्रम उन्मूलन तथा किशोर-किशोरियों के समग्र विकास से संबंधित विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।बैठक में यूनिसेफ इंडिया कंट्री ऑफिस, नई दिल्ली से चाइल्ड प्रोटेक्शन स्पेशलिस्ट जैरस लिगू, यूनिसेफ झारखंड की चाइल्ड प्रोटेक्शन स्पेशलिस्ट सुश्री प्रीति श्रीवास्तव, पीसीआई की स्टेट प्रोग्राम मैनेजर सुश्री अंकिता तथा यूनिसेफ- सामाजिक सुरक्षा के सहायक निदेशक पीयूष उपस्थित रहे।इसके अलावे बाल विवाह रोकथाम,बाल श्रम उन्मूलन एवं किशोर विकास के क्षेत्र में कार्यरत विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।

बैठक के दौरान बाल अधिकारों के संरक्षण एवं बच्चों के समग्र विकास के लिए संचालित विभिन्न कार्यक्रमों की समीक्षा की गई। विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा बाल संरक्षण से जुड़े मुद्दों के प्रभावी समाधान हेतु रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया। इस क्रम में बाल विवाह की रोकथाम, बाल श्रमिकों की पहचान एवं पुनर्वास, सामुदायिक जागरूकता को सुदृढ़ करने तथा किशोर-किशोरियों के सशक्तिकरण और विकास को बढ़ावा देने संबंधी पहलुओं पर विशेष चर्चा हुई।बैठक में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) के आंकड़ों की भी समीक्षा की गई। आंकड़ों के अनुसार जिले एवं राज्य में बाल विवाह की घटनाओं में कमी दर्ज की गई है, जो एक सकारात्मक संकेत है। हालांकि 15 से 19 वर्ष आयु वर्ग की किशोरियों में गर्भधारण की दर में वृद्धि चिंता का विषय है। इस पर सभी प्रतिभागियों ने किशोर स्वास्थ्य, जागरूकता, शिक्षा, जीवन कौशल विकास एवं आवश्यक सहयोगी सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए और अधिक प्रभावी हस्तक्षेप की आवश्यकता पर बल दिया।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि बाल संरक्षण कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु सरकारी विभागों, यूनिसेफ, पीसीआई एवं नागरिक समाज संगठनों के बीच समन्वित प्रयासों को और मजबूत किया जाएगा। सामुदायिक सहभागिता बढ़ाने, जन-जागरूकता अभियान चलाने, रेफरल प्रणाली को सुदृढ़ करने, किशोर-अनुकूल सेवाओं को प्रोत्साहित करने तथा बाल कल्याण संबंधी गतिविधियों की नियमित निगरानी एवं समीक्षा सुनिश्चित करने पर भी सहमति बनी।

उपायुक्त श्री दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने सभी विभागों एवं सहयोगी संस्थाओं द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों और किशोर-किशोरियों के लिए सुरक्षित, संरक्षित एवं विकासोन्मुख वातावरण का निर्माण जिला प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों एवं संस्थाओं से आपसी सहयोग एवं समन्वय के साथ कार्य करते हुए बाल संरक्षण एवं किशोर विकास से जुड़े कार्यक्रमों को और प्रभावी बनाने का आह्वान किया।

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