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“जब शिकारी ही फंस गया:चूहे को निगलने के बाद बिल में अटका चश्माधारी नाग”

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“जब शिकारी ही फंस गया:चूहे को निगलने के बाद बिल में अटका चश्माधारी नाग”

पाकुड़ संवाददाता।प्रकृति के रहस्य और उसके अद्भुत संतुलन को समझ पाना हमेशा आसान नहीं होता। महेशपुर प्रखंड के छिलमपुर गांव में एक ऐसी ही दुर्लभ घटना सामने आई, जिसने ग्रामीणों को हैरान कर दिया। यहां एक चूहा अपनी जान बचाने के लिए बिल में घुसने की कोशिश कर रहा था, जबकि उसका पीछा करते हुए…

“जब शिकारी ही फंस गया:चूहे को निगलने के बाद बिल में अटका चश्माधारी नाग”
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“जब शिकारी ही फंस गया:चूहे को निगलने के बाद बिल में अटका चश्माधारी नाग”

पाकुड़ संवाददाता।
प्रकृति के रहस्य और उसके अद्भुत संतुलन को समझ पाना हमेशा आसान नहीं होता। महेशपुर प्रखंड के छिलमपुर गांव में एक ऐसी ही दुर्लभ घटना सामने आई, जिसने ग्रामीणों को हैरान कर दिया। यहां एक चूहा अपनी जान बचाने के लिए बिल में घुसने की कोशिश कर रहा था, जबकि उसका पीछा करते हुए एक खतरनाक स्पेक्टेकल्ड कोबरा वहां पहुंच गया। लेकिन कुछ ही मिनटों में घटनाक्रम ने ऐसा मोड़ लिया कि शिकारी खुद ही संकट में पड़ गया।

मौत से बचने की आखिरी जद्दोजहद


ग्रामीणों के अनुसार, छिलमपुर निवासी असगर शेख के आंगन में एक चूहा तेजी से भागते हुए अपने बिल में घुसने का प्रयास कर रहा था। तभी करीब साढ़े चार फीट लंबा और लगभग 12-13 वर्ष पुराना चश्माधारी नाग वहां पहुंच गया। फुर्ती दिखाते हुए कोबरा ने चूहे को दबोच लिया और कुछ ही पलों में उसे निगल गया।

शिकार के बाद बढ़ी मुश्किल


चूहे को निगलने के बाद कोबरा का पेट फूल गया और शरीर का आकार पहले से बड़ा हो गया। इसके बाद उसने भी उसी बिल में घुसने की कोशिश की, लेकिन बिल का मुंह छोटा होने के कारण वह अंदर प्रवेश नहीं कर सका। यही वह पल था जिसने पूरे घटनाक्रम को रोचक बना दिया। जो कोबरा कुछ मिनट पहले तक शिकारी था, वह अब अपनी ही भूख की वजह से फंस चुका था।

ग्रामीणों में दहशत और कौतूहल


आंगन में खतरनाक नाग को इस हालत में देख ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। लोगों में भय के साथ-साथ जिज्ञासा भी थी। कई ग्रामीणों ने इस दुर्लभ दृश्य को अपने मोबाइल कैमरों में कैद कर लिया।

रेस्क्यू टीम ने संभाली स्थिति


सूचना मिलते ही स्थानीय सर्प रेस्क्यूअर अशरफुल शेख मौके पर पहुंचे। कोबरा की आक्रामक प्रवृत्ति और स्थिति को देखते हुए रेस्क्यू आसान नहीं था। काफी सावधानी और मेहनत के बाद उन्होंने कोबरा को सुरक्षित तरीके से पकड़ लिया। उन्होंने बताया कि चश्माधारी नाग भारत के सबसे विषैले सांपों में से एक है और ऐसे सांपों को पकड़ने में विशेष सतर्कता बरतनी पड़ती है। बाद में कोबरा को सुरक्षित स्थान पर छोड़ दिया गया।

प्रकृति का अनोखा संदेश


यह घटना केवल एक सांप और चूहे की कहानी नहीं है, बल्कि प्रकृति के उस संतुलन की मिसाल है, जहां हर जीव अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष करता है। कभी शिकारी जीतता है, तो कभी परिस्थितियां उसे भी असहाय बना देती हैं। छिलमपुर की यह घटना अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है—“जिस बिल में चूहा बचने के लिए भागा था, उसी के बाहर उसका शिकारी फंस गया।”

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