रांची।झारखंड में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के संवैधानिक अधिकारों, आरक्षण और प्रतिनिधित्व को लेकर राष्ट्रीय ओबीसी अधिकारी-कर्मचारी मोर्चा की ओर से 21 दिसंबर 2025 को राज्यव्यापी महा-संकल्प कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में स्पष्ट रूप से कहा गया कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ओबीसी हितों से जुड़ी मांगों पर ठोस निर्णय लेते हुए अधिसूचना जारी की जाए।
कार्यक्रम का उद्घाटन माननीय मंत्री श्री योगेंद्र प्रसाद (पेयजल एवं स्वच्छता, उत्पाद शुल्क एवं निषेध विभाग), श्रीमती ममता देवी (माननीय विधायक, रामगढ़), जानकी प्रसाद यादव (अध्यक्ष, राज्य पिछड़ा आयोग), महेंद्र मोदी ‘जल गुरु’ (पूर्व डीजीपी, उत्तर प्रदेश), राजेश गुप्ता एवं लाल बिहारी यादव द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।
मंत्री योगेंद्र प्रसाद का ऐलान
माननीय मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि झारखंड में ओबीसी की आबादी लगभग 55 प्रतिशत होने के बावजूद उन्हें उनका वाजिब अधिकार नहीं मिल रहा है।
उन्होंने कहा—
“अधिकार बिना संघर्ष के नहीं मिलते। आज़ादी भी संघर्ष से मिली थी और झारखंड का निर्माण भी आंदोलन का परिणाम है। मैं यह वादा करता हूं कि ओबीसी के हक, अधिकार और मान-सम्मान में ठेस नहीं पहुंचने दूंगा।”
उन्होंने बताया कि 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण से संबंधित संचिका भारत सरकार के गृह मंत्रालय में लंबित है, जो माननीय राष्ट्रपति के अनुमोदन के बाद नौवीं अनुसूची में शामिल होते ही झारखंड में 27% आरक्षण पुनः बहाल हो सकता है।
मंत्री ने कहा— “बोलो कम, काम ज्यादा करो।”
राज्य पिछड़ा आयोग अध्यक्ष जानकी यादव
जानकी प्रसाद यादव ने कहा कि मोर्चा की सभी 13 सूत्री मांगें पूर्णतः जायज हैं।
उन्होंने कहा—
“27 प्रतिशत आरक्षण कोई कृपा नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकार है। जिसकी जितनी आबादी, उसकी उतनी हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। ओबीसी का आरक्षण 27% से घटाकर 14% किया जाना घोर अन्याय है।”
उन्होंने कहा कि ईडब्ल्यूएस को बिना सामाजिक संघर्ष के 10% आरक्षण मिल गया, जबकि पिछड़ों के अधिकार लगातार छीने जा रहे हैं।
उन्होंने ओबीसी समाज से एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया।
विधायक ममता देवी का वक्तव्य
माननीय विधायक ममता देवी ने कहा कि
“ओबीसी को ग्राम पंचायत से लेकर विधानसभा तक आबादी के अनुपात में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। 27% से 14% आरक्षण की कटौती ने ओबीसी को उनके अधिकार से वंचित किया है। यह लड़ाई एकजुट होकर ही जीती जा सकती है।”
उन्होंने आश्वस्त किया कि सभी मांगों को सरकार के समक्ष मजबूती से रखा जाएगा।
प्रोन्नति में आरक्षण पर कानूनी पक्ष
डॉ अरविंद मोदी (एलएलएम), अधिवक्ता ने कहा कि प्रोन्नति में आरक्षण केवल एससी-एसटी तक सीमित नहीं है, बल्कि अनुच्छेद 16(4) के तहत ओबीसी का भी संवैधानिक अधिकार है।
उन्होंने एम. नागराज, इंद्रा साहनी और जरनैल सिंह मामलों का हवाला देते हुए कहा कि झारखंड में ओबीसी का उच्च पदों पर प्रतिनिधित्व 10% से भी कम है, जो “अपर्याप्त प्रतिनिधित्व” का स्पष्ट प्रमाण है।
उन्होंने तमिलनाडु और कर्नाटक मॉडल अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
मोर्चा की प्रमुख 13 सूत्री मांगें
- ओबीसी को जनसंख्या अनुपात में न्यूनतम 27% आरक्षण
- सरकारी सेवाओं में प्रोन्नति में आरक्षण
- शून्य ओबीसी आरक्षण वाले 7 जिलों में आरक्षण बहाल
- क्रीमी लेयर समाप्त या तीन वर्ष की वैधता
- स्वतंत्र ओबीसी मंत्रालय का गठन
- अधिकतम आयु-सीमा में 5 वर्ष की छूट
- नियुक्तियों में रोस्टर चार्ट सार्वजनिक किया जाए
- न्यायपालिका व सरकारी अधिवक्ता पदों में ओबीसी प्रतिनिधित्व
- ओबीसी शिकायत निवारण प्रकोष्ठ
- सभी जिलों में ओबीसी छात्रावास
- पिछड़ा वर्ग वित्त निगम को पूर्ण क्रियाशील किया जाए
अन्य वक्ताओं के विचार
- श्री आनंद किशोर साहू ने अलग ओबीसी मंत्रालय और शून्य आरक्षण जिलों में तत्काल बहाली की मांग की।
- सेवानिवृत्त न्यायाधीश अरुण प्रसाद ने कहा कि झारखंड में आरक्षण व्यवस्था संविधान की भावना के विपरीत लागू की जा रही है।
- योगेंद्र साव (डिप्लोमा अभियंता संघ) ने ओबीसी समाज से जागरूक और संगठित संघर्ष का आह्वान किया।
- प्रियंका कुमारी ने कहा कि मौन रहने के कारण ओबीसी का शोषण बढ़ा है, अब सड़क पर उतरना होगा।
सम्मान समारोह
कार्यक्रम में ओबीसी क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए
शिवनारायण साहू (कृषि), दिनेश महतो (खेल), डॉ अरविंद मोदी, शानवी श्री (राष्ट्रीय तैराकी) एवं कविता कुमारी (सहायक प्राचार्य) को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में 500 से अधिक अधिकारी-कर्मचारी एवं बुद्धिजीवी उपस्थित थे।
मंच संचालन विवेक कुमार एवं डॉ धर्मरक्षित विद्यार्थी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन परमेश्वर महतो ने दिया