गोमिया।
सीसीएल कथारा क्षेत्र के स्वांग सैलरी के अवार्डी मजदूरों ने नियोजन नहीं मिलने पर सीसीएल प्रबंधन को कड़ा अल्टीमेटम दिया है। मजदूरों ने घोषणा की है कि यदि 5 दिसंबर तक उन्हें नियुक्ति नहीं दी गई, तो वे रांची स्थित सीसीएल मुख्यालय (दरभंगा हाउस) परिसर में आमरण अनशन शुरू कर देंगे। मजदूरों ने चेतावनी दी है कि अनशन के दौरान किसी भी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी सीसीएल प्रबंधन की होगी।
मजदूर नेता मुमताज आलम ने कहा कि सीसीएल प्रबंधन वर्षों से सिर्फ तारीखें बढ़ा रहा है, लेकिन वास्तविक नियोजन देने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा।
“हमारी धैर्य की सीमा अब समाप्त हो चुकी है। मजबूर होकर आमरण अनशन का फैसला लेना पड़ा है। जब तक न्याय नहीं मिलेगा, पीछे नहीं हटेंगे,” उन्होंने कहा।
1992 से जुड़ा मामला, सभी न्यायालयों ने मजदूरों के पक्ष में दिया था निर्णय
यह मामला वर्ष 1992 के C.G.I.T. Ref. No.-58/1992 से जुड़ा है। हजारीबाग और धनबाद के न्यायालयों से लेकर झारखंड हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक—सभी ने अवार्डी मजदूरों के पक्ष में फैसला दिया था।
इसके बावजूद, 2009 में पहचान प्रक्रिया में हुए कथित फर्जीवाड़े के चलते वास्तविक मजदूर आज तक अपने अधिकारों से वंचित हैं।
इन सही अवार्डी मजदूरों की अब भी पात्रता तय
सही अवार्डी मजदूरों में शामिल नाम—
डिवीजन सिंह, बुटकी बाई, सुकवारा बाई, बाबूराम, नीलकंठ धोबी, कोलेश्वर प्रजापति, महेंद्र रजक, सुरेंद्र रजक, प्रेमचंद प्रजापति, प्यारी प्रजापति।
सहयोगी मजदूरों की सूची
दुर्योधन धोबी, कार्तिक भूईया, किटू रविदास, मुकुंद दुषाद, कैला गंझू, जाकिर अंसारी, कमलेश मल्लाह, प्रयाग प्रजापति, टेकलाल प्रजापति, उगन प्रजापति, ठाकुर प्रजापति, बुधन प्रजापति, खुबलाल प्रजापति, भीम प्रजापति, परमेश्वर प्रजापति, ननकी बाई, लखन माली, शुक्ता बाई, छटु माली, लखन जांगड़े, रगमा देवी, बैधराम, सुरवारी बाई, विशेश्वर प्रसाद, परदेशी दास, सीताराम सिदार, फितीन बाई, शिवराम निषाद, श्रीमति देवी, मनोहर, गिरधारी शर्मा, राजेश कुमार ठाकुर, हासिम रजा, बासुदेव महतो, संतोष कुमार महतो, मानेश्वर महतो, विनोद भूईया, मनवा देवी, ननकी देवी, चरकु गंझू, अर्जुन रविदास, फुल बाई सहित अन्य मजदूर शामिल हैं।
सरकार और प्रबंधन से मजदूरों की अंतिम चेतावनी
मजदूरों ने कहा कि उनके धैर्य का बांध अब टूट चुका है।
उन्होंने मांग की—सही अवार्डी मजदूरों को तत्काल नियोजन दिया जाए, अन्यथा आंदोलन और अधिक उग्र होगा।