सतबरवा संवाददाता
रेवारातु(सतबरवा)/पलामू:- पलामू जिले के सतबरवा प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत रेवारातु में ग्रामीणों ने पत्थर माइंस को फर्जी बताया।ग्रामीणों ने माइंस के खिलाफ जमकर नारेबाजी किया और मजबूत एकजुटता दिखाई है।
उन्होंने स्पष्ट रूप से घोषणा की है कि वे अपनी जान की बाजी लगा देंगे, लेकिन अपनी प्राकृतिक संपदा—जल, जंगल और जमीन को इन माफियाओं के हाथों नष्ट नहीं होने देंगे। यह आंदोलन ग्रामीणों की सांस्कृतिक और पर्यावरणीय धरोहर की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।
एक बुजुर्ग ग्रामीण ने भावुक होते हुए कहा, “हमारी प्राकृतिक जंगल और जमीन हमारी आवश्यकताओं का पूरक है। इससे ही हमारा जीवन जुड़ा हुआ है। हमारे पूर्वज इन्हें देवता की तरह पूजते थे। हम किसी भी कीमत पर इन माफियाओं को जंगल उजाड़ने की अनुमति नहीं देंगे।”
सभा की अध्यक्षता कर रहे शिवराज सिंह ने बताया कि लगातार वन्य भूमि को कटा जा रहा है इसे बचाना है। “हम अपनी जान दे देंगे, लेकिन जंगल को पत्थर माफियाओं के हवाले नहीं होने देंगे। जिसकी रक्षा हमारी जिम्मेदारी है।”
समाजसेवी आशीष कुमार सिन्हा ने कहा कि “मैं हमेशा गरीब किसानों और ग्रामीणों के हितों के लिए संघर्ष करता रहा हूं। यदि हमारी मांगों पर सुनवाई नहीं हुई, तो हम ब्लॉक से सदन तक बात को रखेंगे और संवैधानिक तरीके से प्रखंड कार्यालय का घेराव करेंगे। यह मुद्दा केवल पर्यावरण का नहीं, बल्कि स्थानीय समुदाय की अस्तित्व का है।”
महिलाओं ने मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि”केवल मइया सम्मान योजना से हमारा मान-सम्मान सुरक्षित नहीं होगा। हमारे घर-परिवार, जल-जंगल, पशु और पूरे समाज की रक्षा भी उतनी ही जरूरी है। सरकार को इस पर तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।