नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क।
नेपाल में केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद राजनीतिक हलचल में तेजी आई है। पार्टीभेद और व्याप्त अशांति के बीच, नेपाल की पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की को राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने आज अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में शपथ दिलाई है। यह नियुक्ति उनके लिए ऐतिहासिक क्षण है, क्योंकि वह नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी हैं।
हिंसक आंदोलनों के बाद राजनीतिक ऐतिहासिक क्षण
यह बड़ा कदम सृजित हुआ है उस समय जब देश में चल रहे ‘Gen-Z’–युवा-आंदोलन ने वहाँ की सियासत की दिशा ही बदल दी। इस आंदोलन के तहत करप्शन, बेरोजगारी और सोशल मीडिया पर प्रतिबंध जैसे मुद्दों को उठाते हुए युवा सड़कों पर उतर आए। इन जन आंदोलनों ने सत्ता का खेमा ही हिला दिया और केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देने पर विवश कर दिया।
सुशीला कार्की का सवर्णयात्रा
73 वर्षीय सुशीला कार्की न केवल नेपाल की पहली महिला चीफ जस्टिस रही हैं (2016–2017), बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उनके साहसिक फैसलों के लिए उनका नाम खूब उभरा। इस नई राजनीतिक भूमिका के लिए उन्हें आंदोलन के नेताओं, राष्ट्रपति और सेना प्रमुख की चर्चाओं के परिणामस्वरूप चुना गया।
शपथ और नियुक्तियों का क्रम
12 सितंबर को राष्ट्रपति पद के आवास पर आयोजित एक गोपनीय समारोह में सुशीला कार्की ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, जिसे प्रसारण के माध्यम से आम जनता तक पहुँचाया गया। साथ ही, संसद को भंग कर दिया गया और नई आम चुनाव की तारीख 5 मार्च 2026 तय की गई।
सत्ता की अल्पकालिक जिम्मेदारी
सुशीला कार्की ने स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार केवल संक्रमणकालीन होगी और छह माह से अधिक समय तक नहीं चलेगी। उनका मुख्य लक्ष्य चुनावों तक न्यायपूर्ण और शांतिपूर्ण स्थिरता सुनिश्चित करना है।
पहली कार्यवाहियाँ—सम्मान और पुनर्निर्माण
प्रधानमंत्री पद संभालते ही कार्की ने अत्यंत प्रतीकात्मक पहल की—अन्यायपूर्ण रूप से मारे गए प्रदर्शनकारियों को ‘मार्ट्र्स’ (वीर न्यायिक) का दर्जा देने की घोषणा। यह कदम राष्ट्रीय एकता और सामूहिक आत्मविश्वास को पुनर्जीवित करने में अहम माना जा रहा है।
शोक संवेदना और व्यावहारिक राहत
प्रदर्शन में मारे गए लोगों की याद में उन्होंने एक मिनट का मौन रखा और मृतकों के परिवारों को 1 लाख नेपाली रुपयों (तथा घायल हुए लोगों को मुफ्त चिकित्सा) की घोषणा की—जो सार्वजनिक विश्वास बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है।
चुनौतियों की सूची—आगे क्या झेलना होगा?
उनके सामने सबसे बड़ी चुनौतियाँ हैं—देश में फिर से सांविधिक व्यवस्था स्थापित करना, चुनाव सुनिश्चित करना, अपराध और भय की चुनौतियों पर काबू पाना, साथ ही भ्रष्टाचार और आर्थिक असमानता पर लगाम लगाना। भौतिक क्षति को पुनर्स्थापित करना और विश्वास बहाल करना उनकी प्राथमिकता होगी।
सुशीला कार्की की यह नियुक्ति नेपाल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत के रूप में देखी जा रही है। युवाओं की आवाज़ के साथ न्याय, पारदर्शिता और लोकतंत्रीय प्रक्रिया का नया अध्याय लिखने की अपील करती यह सरकार, देश को स्थिरता और नए राजनीतिक विश्वास की ओर मार्गदर्शित करने का दायित्व लिए हुए है।