जमशेदपुर : रविवार को सोनारी मैरीन ड्राइव स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के रिट्रीट सेंटर यूनिवर्सल पीस पैलेस में रक्षाबंधन का त्यौहार श्रद्धापूर्वक मनाया गया। रक्षाबंधन के इस कार्यक्रम में डॉ प्रशांत काअकोडे, डायरेक्टर ब्रह्माकुमारी इनर स्पेस कैंब्रिज यूके तथा ब्रह्माकुमारी सिस्टर अनन्या राजयोगा ट्रेनर मेलबर्न ,ऑस्ट्रेलिया विशेष तौर पर सात समंदर पार से भारत में इस त्यौहार को मनाने के लिए आयीं।
इस दौरान एक घंटे का विशेष सत्र भी आयोजित की गई। जिसमें मिस्त्री और मैजिक इन अवर लाइफ विषय पर डॉ प्रशांत काअकोडे व्याख्यान दिये। कार्यक्रम के दौरान जीवन की सबसे गहरी सच्चाई कि मैं कौन हूं ? इसे स्पष्टता से बताया गया l डॉ प्रशांत काअकोडे ने कहा कि विश्व एक रंगमंच है , ड्रामा है । जिसमें मैं अदृश्य आत्मा एक किरदार निभा रहा हूं। वास्तव में मैं एक अदृश्य मुसाफिर हूं, मेहमान हूं, जिनका स्थाई घर परमात्मा का अविनाशी घर है जो इस परिवर्तनशील दुनिया में आकर अलग-अलग पार्ट निभाती है।
उन्होंने कहा कि इस धरती पर हम मेहमान है। मेहमान होने के कारण स्वतंत्रता अनुभव होती है। एक शरीर में दो पर्सनालिटी होती है। एक व्यक्ति में सुबह एक पर्सनालिटी और शाम में दूसरा पर्सनालिटी देखने को मिलता है। जिस प्रकार पर्सनालिटी चेंज होता है उसी प्रकार शरीर का बीमारी भी चेंज हो जाता है। उन्होंने विदेशों समेत भारत में घटित सच्ची घटनाओं तथा कई उदाहरणों से जीवन के रहस्य, पुनर्जन्म आदि की सार्थकता को समझाया। अनन्या बहन ने कहा कि इस पृथ्वी पर से सबों का जाना निश्चित है।
लेकिन कब जाना है यह निश्चित नहीं है। इस लिए यहां धरती पर हम यात्री है। उन्होंने वर्तमान यात्रा और आगे की यात्रा पर प्रकाश डालीं। उन्होंने कहा कि यात्रा बिना बताए खत्म होती है। हम यहां मोह , माया , मेरा , रिश्ता नाता के चक्कर में इमोशनल प्रोब्लम का शिकार है। ऐसे में इस सबका उपाय है मेडिटेशन। आगे कहा कि जैसे मेडिसिन से शरीर की बीमारियां ठीक होती है वैसे ही मन की बीमारियों को राजयोग मेडिटेशन से ठीक कर सकते हैंl कार्यक्रम में डेजी रानी जी, तारु बहन कमानी जी, सेवानिवृत्त आरक्षी उपाधीक्षक सरयू पासवान जी , जया दुकनिया, चार्टर्ड अकाउंटेंट पवन अग्रवाल जी , आदर्श सेवा संस्था की सचिव प्रभा जायसवाल समेत गणमान्य लोग उपस्थित थे।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम के दौरान अंजू बहन उपस्थित जनों के कलाई पर परम रक्षक अविनाशी संबंधी परमात्मा का रक्षा सूत्र बांधी। अपने हाथों से तिलक लगाई। सबों का मुंह मीठा कराया गया। कार्यक्रम के अंत में राजयोग मेडिटेशन की गहन अनुभूति भी कराई गईl गौरतलब हो कि राजयोग मेडिटेशन ब्रह्माकुमारी के प्रत्येक सेवा केंद्र में निःशुल्क सिखाया जाता है।