लातेहार, 24 फरवरी 2025: लातेहार जिले के जालिमखुर्द गांव में आज वाटरशेड यात्रा के अंतर्गत जागरूकता कार्यक्रम का समापन समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर जल, जंगल और जमीन के संरक्षण को लेकर स्थानीय ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और सरकारी अधिकारियों ने मिलकर विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम के दौरान सामूहिक वृक्षारोपण भी किया गया, जिसमें क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ ग्रामीणों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया।
भारत सरकार और राज्य सरकार की टीम ने किया दौरा, कार्यों की सराहना
वाटरशेड परियोजना की प्रगति और क्रियान्वयन का आकलन करने के लिए भारत सरकार और झारखंड राज्य सरकार की एक विशेष टीम लातेहार पहुंची। भारत सरकार के भूमि संसाधन विभाग (DOLR) के श्री विकास हसनानी, राज्य सरकार के प्रतिनिधि और अन्य अधिकारी इस कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने स्थानीय जनता से बातचीत कर वाटरशेड से जुड़े विभिन्न कार्यों और उनकी उपयोगिता पर गहराई से चर्चा की।
सरकारी टीम ने लातेहार जिले में वाटरशेड परियोजना के तहत किए गए विभिन्न कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया और उसकी गुणवत्ता को लेकर संतोष जाहिर किया। उन्होंने विशेष रूप से किसानों की भागीदारी और ग्रामीणों की जागरूकता को देखकर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की।
लातेहार के वाटरशेड प्रोजेक्ट को मिलेगी विशेष पहचान
भारत सरकार के प्रतिनिधि श्री विकास हसनानी ने कहा,
“लातेहार में वाटरशेड प्रोजेक्ट के अंतर्गत किए गए कार्य सराहनीय हैं। हम इन विकास कार्यों की एक विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपेंगे और लातेहार को वाटरशेड परियोजना के क्षेत्र में एक विशेष पहचान दिलाने का प्रयास करेंगे।”
उन्होंने आगे बताया कि जल संरक्षण, भूमि प्रबंधन और हरियाली बढ़ाने के लिए किए गए इन कार्यों से पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में काफी मदद मिलेगी। लातेहार में इस परियोजना का सफल क्रियान्वयन भूमि संरक्षण पदाधिकारी लातेहार के नेतृत्व में किया जा रहा है, जिसे सरकार ने अत्यंत प्रशंसनीय बताया।
सामूहिक वृक्षारोपण से दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
कार्यक्रम के समापन के बाद भारत सरकार और राज्य सरकार के प्रतिनिधियों ने ग्रामीणों के साथ मिलकर वृक्षारोपण किया। यह पहल जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय सुधार के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से की गई।
कार्यक्रम में शामिल हुए गणमान्य व्यक्ति
इस अवसर पर राज्य जल छाजन मिशन के तकनीकी विशेषज्ञ कौशलेंद्र कुमार, लखन लाल महतो, विपुल आकाश, जिला परिषद सदस्य विनोद उरांव और जालिमखुर्द की मुखिया सुनीता देवी सहित अन्य अधिकारी एवं ग्रामीण उपस्थित थे।
वाटरशेड परियोजना का उद्देश्य और लाभ
वाटरशेड परियोजना का मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण, भूमि सुधार और जंगलों को बचाना है। इस परियोजना के तहत कृषि भूमि की उर्वरता को बनाए रखने, जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने और हरियाली को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न उपाय किए जाते हैं। इस यात्रा के माध्यम से लोगों को जल संचयन, वृक्षारोपण और मिट्टी संरक्षण के महत्व को समझाने की कोशिश की गई।
ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी से बढ़ी परियोजना की सफलता
सरकारी टीम ने निरीक्षण के दौरान यह महसूस किया कि लातेहार में ग्रामीणों की भागीदारी इस परियोजना को सफल बनाने में एक महत्वपूर्ण कारक रही है। स्थानीय लोग इस योजना का लाभ उठाते हुए जल संरक्षण के प्रति जागरूक हो रहे हैं और अपनी जमीन की उपजाऊ क्षमता को बनाए रखने के लिए बेहतर तकनीकों को अपना रहे हैं।
सरकारी अधिकारियों ने दी योजनाओं की जानकारी
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने ग्रामीणों को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी, जो जल संरक्षण और कृषि विकास से जुड़ी हैं। उन्होंने बताया कि सरकार किसानों को जल संचयन और भूमि सुधार के लिए विशेष सहायता दे रही है, जिससे उनकी उपज और आय में वृद्धि हो सके।
लातेहार को मिलेगा विशेष सहयोग
राज्य और केंद्र सरकार के अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि लातेहार जिले को वाटरशेड परियोजना के तहत विशेष सहयोग दिया जाएगा। इसके लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता भी बढ़ाई जाएगी, ताकि जल संरक्षण और भूमि प्रबंधन के क्षेत्र में लातेहार को एक मॉडल जिले के रूप में विकसित किया जा सके।