दिल्ली:- लाल किला भारत की राजधानी दिल्ली में स्थित एक ऐतिहासिक किला है, जो मुगल बादशाह शाहजहाँ द्वारा 17वीं शताब्दी में बनवाया गया था। यह किला अपनी विशाल और भव्य वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है, और यह भारत के सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थलों में से एक है।
आईए जानते हैं लाल किले का कब शुरू हुआ
लाल किले का निर्माण 1648 में शुरू हुआ था, और यह 9 साल में पूरा हुआ था। इसका निर्माण शाहजहाँ के शासनकाल में हुआ था, जो मुगल साम्राज्य के सबसे शक्तिशाली और प्रभावशाली बादशाहों में से एक थे।
लाल किले की वास्तुकला मुगल और फारसी शैलियों का मिश्रण है। इसकी दीवारें लाल पत्थर से बनी हुई हैं, जो इसे अपना विशिष्ट रंग देती हैं। किले के अंदर कई भव्य महल, मस्जिदें और बाग़ हैं, जो इसकी भव्यता और सौंदर्य को दर्शाते हैं।
लाल किले का सबसे प्रसिद्ध हिस्सा दीवान-ए-आम है, जो एक भव्य दरबार हॉल है। यहाँ पर बादशाह अपने दरबारियों और विदेशी राजदूतों से मिलते थे। दीवान-ए-आम की दीवारें और छतें विशाल और भव्य हैं, और यहाँ पर कई सुंदर चित्र और मूर्तियाँ हैं।
लाल किले के अन्य प्रसिद्ध हिस्सों में दीवान-ए-खास, मुमताज महल, और ख्वाबगाह शामिल हैं। दीवान-ए-खास एक छोटा सा दरबार हॉल है, जहाँ पर बादशाह अपने निकटतम दरबारियों से मिलते थे। मुमताज महल एक सुंदर महल है, जो शाहजहाँ की पत्नी मुमताज महल के लिए बनवाया गया था। ख्वाबगाह एक सुंदर बाग़ है, जहाँ पर बादशाह और उनके दरबारी आराम करते थे।
लाल किला न केवल एक ऐतिहासिक स्थल है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भी है। यहाँ पर कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएँ हुई हैं, और यहाँ पर कई प्रसिद्ध ऐतिहासिक व्यक्तियों ने अपने जीवन का एक हिस्सा बिताया है।
आजकल, लाल किला एक प्रमुख पर्यटन स्थल है, और यहाँ पर हर साल लाखों पर्यटक आते हैं। यहाँ पर कई संग्रहालय और प्रदर्शनी हैं, जो इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता को दर्शाते हैं। लाल किला एक ऐसा स्थल है, जो भारत की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है, और यहाँ पर आने वाले पर्यटकों को एक अनोखा और अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करता है।