झारखंडस्थानीय समाचार

घाघरा का सरहुल आज एकता की डोर में बंध गया प्राकृतिक पर्व सरहुल नगाड़ा और मांदर की थाप में थिरके के लोग

घाघरा का सरहुल आज एकता की डोर में बंध गया प्राकृतिक पर्व सरहुल नगाड़ा और मांदर की थाप में थिरके के लोग
  • शोभायात्रा में पारंपारिक वेशभूषा में शामिल हुए लोग सभी समाज के लोगो ने जगह जगह पर पानी चना गुड़ की व्यवस्था की थी

प्रेम कुमार साहू की रिपोर्ट,

घाघरा:- धूमधाम से मनाया गया सरहुल पर्व एकता की डोर में बंध गया सभी जाति एवं धर्म के लोग कोई जातीय बंधन नहीं रहा हम एक हैं और एक रहेंगे एकता का कोई तोड़ नहीं। सरहुल शोभायात्रा के स्वागत में पानी चना गुड़ का वितरण श्री सर्वेश्वरी समूह चांदनी चौक के  वही सरहुल संचालन समिति के तत्वाधान में प्राकृतिक पर्व सरहुल में सरना स्थल कर्म डीपा में पहान पुजार  ने पूजा अर्चना की और गांव की सुख समृद्धि के लिए प्रार्थना की गई ।पारंपारिक ढोल मांदर की थाप पर झाँखरा कुंभा से मेन रोड चांदनी चौक होते हुए थाना चौक ब्लॉक चौक होते हुए कर्मडीपा मैदान तक शोभायात्रा पहुंचा  शोभायात्रा में विभिन्न गांव से आये कुल 260 खोड़ा शोभायात्रा में शामिल हुए । सभी खोड़ा को एक एक स्टील का ड्राम देकर पुरस्कृत किया जाएगा। मुख्य अतिथि के रूप में डीआईजी रविंद्र भगत भाजपा नेता अशोक उरांव  कांग्रेस के प्रदेश सचिव शिवकुमार भगत पूर्व जिला परिषद सदस्य तेम्बू उराँव अनिल भगत रवि पाहन शामिल हुए एवं उन्होंने कहा कि समाज के लोगों को संस्कृति एवं परंपरा को बचाने के लिए सभी लोगो को आगे आना होगा।  

नशापान से दूर रहकर समाज के हित में काम करें एकता की डोर में बांध दिया प्राकृतिक पर्व सरहुल: डीआईजी रविंद्र भगत

ने कहा कि संस्कृति परंपरा को बचाने एवं हमें प्राकृति से प्रेम करना हैं प्राकृति है तो सब कुछ है इन दिनों देखा जा रहा है कि प्राकृति के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है अगर इस तरह की खिलवाड़ होता रहा तो आने वाला समय में प्राकृति का नामो निशान मिट जाएगा।आपसी भाईचारा एवं प्रेम का संदेश है सरहुल पर्व: भाजपा नेता अशोक उराँवभाजपा नेता अशोक उरांव ने  इस क्षेत्र के साथ-साथ पूरे देश में सुख समृद्धि की कामना की सरहुल झारखंड का महत्वपूर्ण पर्व है।प्राकृतिक के पूजक है हमारे आदिवासी समाज के लोग कांग्रेस के प्रदेश सचिव शिवकुमार भगतने कहा कि सरहुल का त्योहार धरती माता को समर्पित है आदिवासियों का मानना है कि वह इस त्यौहार को मनाने जाने के बाद ही नई फसल का उपयोग मुख्य रूप से धान पेड़ के पत्ते फूलों और फलों का उपयोग कर सकते हैं।

सरहुल पर्व आदिवासियों की पहचान है:घाघरा प्रमुख सविता देवी

सरहुल पर्व में आदिवासी संस्कृति की झलक देखने को मिलती है प्राकृतिक पर्व सरहुल पूर्वजों की देन है आदिवासियों की पहचान है इसे संजोए रखने की जरूरत है।घाघरा पुलिस की ओर से सुरक्षा का था पुख्ता इंतजाम मुख्य रूप से इनकी रही उपस्थिति डीआईजी रविंद्र भगत भाजपा नेता अशोक उरांव कांग्रेस पार्टी के प्रदेश सचिव शिवकुमार भगत रवि पाहन अनिल भगत मुकेश महापात्र धन कुंवर साहू अनिरुद्ध चौबे आकाश साहू निर्मल पाहन बसंती उरांव बॉबी भगत शीला कुजूर लालदेव भगत बिंदेश्वर साहू पूर्व जिला परिषद सदस्य तेम्बू उराँव भिखारी भगत कौशल किशोर सिंह जोगेंद्र भगत पूर्व मुखिया गीता कुमारी एवं सरना  संचालन समिति के सैकड़ो कार्यकर्ता मुख्य रूप से उपस्थित रहे.

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