पाकुड़ जेल में बंद 15 विचाराधीन कैदियों को राहत की उम्मीद, मामलों की समीक्षा
Pakud News

जमानत और आपसी समझौते से जुड़े मामलों पर फोकस, पात्र बंदियों को विधिक सहायता देकर रिहाई की प्रक्रिया तेज करने पर जोर
पाकुड़ संवाददाता:- जेल में बंद विचाराधीन कैदियों को कानूनी राहत दिलाने की दिशा में पाकुड़ में पहल तेज की गयी है। गुरुवार को व्यवहार न्यायालय में आयोजित विचाराधीन बंदी समीक्षा समिति (यूटीआरसी) की चौथी बैठक में मंडल कारा में बंद कैदियों के मामलों की समीक्षा की गयी। इस दौरान आपसी समझौते से निपटाए जा सकने वाले आपराधिक मामलों से जुड़े 15 विचाराधीन बंदियों को चिह्नित किया गया। संबंधित पदाधिकारियों को इन मामलों में नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया।
जमानत के बावजूद जेल में बंद कैदियों के मामलों पर चर्चा
झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा), रांची के निर्देश पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) के अध्यक्ष दिवाकर पांडेय की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें गंभीर बीमारी से पीड़ित, वृद्ध और जमानत मिलने के बावजूद जमानतदार उपलब्ध नहीं होने के कारण जेल में बंद विचाराधीन कैदियों के मामलों पर विशेष चर्चा की गयी। जमानत के योग्य बंदियों के मामलों की भी समीक्षा की गयी।

झालसा की ओर से निर्धारित 16 श्रेणियों में से चौथी श्रेणी के तहत आपसी समझौते से निपटाए जा सकने वाले आपराधिक मामलों से संबंधित 15 बंदियों की पहचान की गयी। समिति ने संबंधित मामलों में नियमानुसार आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया, ताकि पात्र बंदियों को समय पर कानूनी राहत मिल सके।
कानूनी जानकारी के अभाव में न हो किसी को परेशानी
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिवाकर पांडेय ने कहा कि झालसा का उद्देश्य गरीब और असहाय विचाराधीन बंदियों को विधिक सहायता उपलब्ध कराना है। कोई भी पात्र बंदी केवल कानूनी जानकारी या सहायता के अभाव में अनावश्यक रूप से जेल में बंद न रहे, इसके लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने योग्य बंदियों को निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराने और नियमानुसार रिहाई की प्रक्रिया में तेजी लाने पर जोर दिया।
बैठक में उपायुक्त सह डालसा की उपाध्यक्ष मेघा भारद्वाज, पुलिस अधीक्षक सह डालसा के सदस्य अनुदीप सिंह, डालसा की सचिव रूपा बंदना किरो और मंडल कारा के जेल अधीक्षक उपस्थित थे।
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