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बोर्ड की मंजूरी के बिना टेंडर निकालने और विकास कार्यों में भेदभाव का आरोप,अध्यक्ष-उपाध्यक्ष ने दावों को किया खारिज

पाकुड़ संवाददाता।दो करोड़ रुपये की विकास योजनाओं के टेंडर ने पाकुड़ नगर परिषद की राजनीति गरमा दी है। आठ वार्डों में विकास कार्यों के आवंटन को लेकर नाराजगी अब सड़क पर उतर आयी है। विकास योजनाओं में भेदभाव और बोर्ड की मंजूरी के बिना टेंडर जारी करने का आरोप लगाते हुए वार्ड पार्षदों ने सोमवार को नगर परिषद कार्यालय के समीप धरना दिया। प्रदर्शन के दौरान अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई। विरोध जताने के लिए उनके पुतले भी रखे गये। धरने का नेतृत्व रूपाली सरकार ने किया।
दो करोड़ की योजनाओं पर सवाल,आठ वार्डों को लेकर आर-पार की लड़ाई
वार्ड नंबर 13 के पार्षद असलम अंसारी ने आरोप लगाया कि नगर परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष ने बोर्ड की बैठक से स्वीकृति लिये बिना दो करोड़ रुपये की योजनाओं का टेंडर निकाल दिया। उन्होंने वार्ड नंबर 1, 2, 3, 6, 12, 13, 15 और 17 को विकास कार्यों से वंचित रखने का आरोप भी लगाया।
प्रदर्शनकारी पार्षदों ने सवाल उठाया कि जब नगर परिषद के सभी वार्डों में विकास कार्यों की जरूरत है, तो योजनाओं का आवंटन कुछ वार्डों तक सीमित क्यों रखा जा रहा है? उनका कहना था कि विकास योजनाओं के बंटवारे में पारदर्शिता और समानता सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि किसी वार्ड के साथ भेदभाव न हो।

धरने पर बैठे पार्षदों ने ‘नगर परिषद होश में आओ’ और ‘सभी वार्डों को समान रूप से काम मिले’ लिखी तख्तियां लेकर विरोध जताया। पार्षदों ने स्पष्ट किया कि वार्डों के साथ कथित भेदभाव और टेंडर प्रक्रिया पर उठे सवालों का जवाब मिलना चाहिए।
पहले शिकायत, अब उपायुक्त के दरबार में उठेगा मामला
पार्षद असलम अंसारी ने बताया कि मामले से नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी को पहले ही अवगत कराया गया था, लेकिन उनके अनुसार, कोई ठोस पहल नहीं हुई। इसके बाद संबंधित वार्डों के पार्षदों को धरने पर बैठना पड़ा।
पार्षदों ने अब उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर मामले में हस्तक्षेप की मांग करने का निर्णय लिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इसके बाद भी कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन तेज किया जाएगा और न्याय के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
अध्यक्ष बोलीं- आरोप बेबुनियाद, उपाध्यक्ष का दावा- बोर्ड से पारित हैं योजनाएं
पार्षदों के आरोपों पर नगर परिषद अध्यक्ष शबरी पाल ने उन्हें बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि बोर्ड में पारित किये बिना किसी योजना को धरातल पर नहीं उतारा गया है। उनके अनुसार, सभी वार्डों को ध्यान में रखते हुए जरूरत के हिसाब से विकास कार्यों का आवंटन किया जा रहा है।
वहीं, उपाध्यक्ष राणा ओझा ने कहा कि नगर परिषद में कुल 21 वार्ड हैं और बहुमत के लिए 11 पार्षदों का समर्थन जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि दो करोड़ रुपये की संबंधित योजनाएं बोर्ड से पारित हैं। उन्होंने कहा कि जिस वार्ड में विकास कार्यों की अधिक जरूरत होती है, वहां प्राथमिकता के आधार पर योजनाएं आवंटित की जाती हैं।
अब सवाल यह है कि दो करोड़ रुपये की योजनाओं को लेकर उठे आरोपों और अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के दावों के बीच सच्चाई क्या है? इसका जवाब टेंडर प्रक्रिया, बोर्ड की बैठक के प्रस्ताव और योजनाओं के वार्डवार आवंटन के रिकॉर्ड से ही स्पष्ट हो सकेगा।
धरने में मिथुन मरांडी, उज्ज्वल हरि, किरण, लाल कपड़े, भीम सिंह, आलमगीर अंसारी, रूपाली सरकार समेत अन्य वार्ड पार्षद मौजूद थे।
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