सर्पदंश के बाद झाड़-फूंक में न गंवाएं समय, सीधे अस्पताल पहुंचें
मानसून में बढ़ जाता है सर्पदंश का खतरा, 80 प्रतिशत मामले विषहीन सांपों के

लातेहार। मानसून के दौरान सर्पदंश की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। अंतरराष्ट्रीय सर्पदंश जागरूकता दिवस के अवसर पर शनिवार को सिविल सर्जन कार्यालय सभागार में जागरूकता सह उन्मुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गई। सिविल सर्जन डॉ. राजमोहन खलखो की अध्यक्षता में आयोजित कार्यशाला में सर्पदंश से बचाव और तत्काल उपचार को लेकर लोगों को जरूरी जानकारी दी गई।
डॉ. खलखो ने बताया कि जिले में सर्पदंश की कुल घटनाओं में करीब 80 प्रतिशत मामले विषहीन सांपों के होते हैं। इसके बावजूद कोबरा, करैत और रसेल वाइपर जैसे विषैले सांपों से होने वाले दंश को गंभीरता से लेना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सर्पदंश के बाद घबराने के बजाय पीड़ित को शांत रखें और प्रभावित अंग को स्थिर रखने का प्रयास करें। सबसे महत्वपूर्ण है कि मरीज को बिना देरी नजदीकी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया जाए।
उन्होंने बताया कि जिले के सदर अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में सर्पविषरोधी दवा उपलब्ध है। समय पर अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकीय निगरानी में आवश्यक उपचार किया जा सकता है।
दंश वाली जगह पर चीरा लगाने से बचें
कार्यशाला में सर्पदंश के बाद अपनाए जाने वाले अंधविश्वास और गलत तरीकों से भी लोगों को सावधान किया गया। सांप के काटने वाली जगह पर चीरा लगाने, काटने, चूसने या दबाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। मुंह से जहर निकालने का प्रयास भी नहीं करना चाहिए। पीड़ित को अनावश्यक रूप से चलाने या खड़ा करने के बजाय शांत रखते हुए जल्द अस्पताल ले जाने पर जोर दिया गया।
सिविल सर्जन ने लोगों से अपील की कि सर्पदंश के बाद ओझा-गुणी और झाड़-फूंक के चक्कर में समय न गंवाएं। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में हर मिनट महत्वपूर्ण हो सकता है, इसलिए पीड़ित को तत्काल स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाना ही सबसे जरूरी कदम है।
कार्यक्रम में जिला कार्यक्रम प्रबंधक निर्मल दास, जिला डाटा प्रबंधक वेद प्रकाश, जिला महामारी विशेषज्ञ डॉ. अंजली प्रिया, मो. प्रवेज अख्तर, नागेंद्र कुमार, संजय सिन्हा, करुणेश कुमार समेत सिविल सर्जन कार्यालय के कर्मी मौजूद थे।
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