गांव की बेटी मानसी ने रचा इतिहास,लगातार दूसरी बार जीता गोल्ड मेडल
एमएससी वनस्पति विज्ञान में 9.75 सीजीपीए के साथ डीएसपीएमयू की यूनिवर्सिटी टॉपर, 24 सितंबर को मिलेगा स्वर्ण पदक

पाकुड़ संवाददाता। महेशपुर प्रखंड के छोटे से गांव सिलमपुर की बेटी मानसी सिंघा ने अपनी मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प से यह साबित कर दिया है कि सफलता के लिए बड़े शहर या बड़े संसाधन नहीं, बल्कि मजबूत इच्छाशक्ति जरूरी है। सीमित संसाधनों के बीच पढ़ाई करते हुए मानसी ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (डीएसपीएमयू), रांची की एमएससी वनस्पति विज्ञान परीक्षा में 9.75 सीजीपीए हासिल कर प्रथम स्थान प्राप्त किया है। उनकी इस उपलब्धि पर 24 सितंबर 2026 को विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में उन्हें स्वर्ण पदक से सम्मानित किया जाएगा।
खास बात यह है कि यह मानसी का लगातार दूसरा गोल्ड मेडल होगा। इससे पहले वर्ष 2025 में उन्होंने सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय, दुमका से बीएससी वनस्पति विज्ञान ऑनर्स में प्रथम श्रेणी में प्रथम स्थान हासिल कर गोल्ड मेडल जीता था। उस समय उन्होंने केकेएम कॉलेज, पाकुड़ का प्रतिनिधित्व किया था।

सिलमपुर से यूनिवर्सिटी टॉपर तक का सफर
मानसी की सफलता केवल दो स्वर्ण पदक हासिल करने की कहानी नहीं है, बल्कि यह शिक्षा के प्रति समर्पित परिवार की प्रेरणादायक कहानी भी है। मानसी की प्रारंभिक शिक्षा महेशपुर में हुई। उनके पिता साधन सिंघा और मां अनामिका सिंघा दोनों शिक्षक हैं। उनके मौसा-मौसी भी शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हैं।
परिवार में शिक्षा की परंपरा को आगे बढ़ाने में उनकी दादी दीपाली सिंघा, जो स्वयं पूर्व शिक्षिका रही हैं, की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। परिवार से मिले निरंतर प्रोत्साहन और शैक्षणिक माहौल ने मानसी को बचपन से ही पढ़ाई के प्रति गंभीर बनाया।
बीएससी के बाद एमएससी में भी टॉप
मानसी ने बीएससी में गोल्ड मेडल हासिल करने के बाद एमएससी में भी विश्वविद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त कर अपनी निरंतरता साबित की है। लगातार दो विश्वविद्यालयों में उत्कृष्ट प्रदर्शन उनकी मेहनत और शैक्षणिक क्षमता का प्रमाण है। उनकी उपलब्धि ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों, विशेषकर छात्राओं के लिए प्रेरणा बनी है।
मानसी ने साबित किया है कि सीमित संसाधन प्रतिभा के रास्ते में बाधा नहीं बन सकते। लक्ष्य के प्रति समर्पण, अनुशासन और निरंतर मेहनत से गांव से निकलकर भी बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।
परिवार और गुरुजनों को दिया सफलता का श्रेय
अपनी सफलता का श्रेय मानसी ने अपने माता-पिता, नानी, मौसा-मौसी, बहन और शिक्षकों को दिया है। उन्होंने अपने शिक्षक एवं मार्गदर्शक डॉ. प्रसंजित मुखर्जी के शैक्षणिक मार्गदर्शन और प्रोत्साहन को भी अपनी सफलता में महत्वपूर्ण बताया।
महेशपुर से पाकुड़ तक खुशी का माहौल
मानसी की उपलब्धि से सिलमपुर गांव और उनके परिवार में खुशी का माहौल है। महेशपुर जैसे ग्रामीण क्षेत्र से निकलकर लगातार दूसरी बार विश्वविद्यालय स्तर पर स्वर्ण पदक हासिल करना पाकुड़ जिले के लिए भी गौरव की बात है।
डीएसपीएमयू के वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. ईश्वरी प्रसाद गुप्ता ने मानसी को उनकी उपलब्धि पर बधाई दी है। विभाग के डॉ. अशोक कुमार नायक, डॉ. विद्यायन, डॉ. रश्मि मिश्रा और डॉ. अपर्णा सिन्हा ने भी उन्हें शुभकामनाएं देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
दो गोल्ड मेडल, लेकिन मंजिल अभी बाकी
दो वर्षों में दो स्वर्ण पदक और एमएससी में 9.75 सीजीपीए के साथ विश्वविद्यालय में प्रथम स्थान हासिल करने वाली मानसी सिंघा की उपलब्धि न सिर्फ उनके परिवार, बल्कि महेशपुर, पाकुड़ और झारखंड के लिए गर्व का विषय है। अब उनकी नजर उच्च शिक्षा और शिक्षण के क्षेत्र में आगे बढ़ने पर है। मानसी की कहानी ग्रामीण प्रतिभाओं के लिए यह संदेश देती है कि सही मार्गदर्शन और निरंतर मेहनत से गांव की गलियों से निकलकर भी सफलता की नई ऊंचाइयां हासिल की जा सकती हैं।
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