
नई दिल्ली, 30 अगस्त। (आरएनएस) नीट पेपर लीक के विरोध में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के प्रदर्शन और 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च को लेकर 36 दिनों तक भूख हड़ताल करने वाले पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने बताया कि वह अपना अनशन सम्मानजनक तरीके से समाप्त करना चाहते थे और उनकी इच्छा थी कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी उन्हें जूस पिलाकर अनशन समाप्त करवाएं।
वांगचुक ने 20 जुलाई के संसद मार्च की रणनीति का भी खुलासा किया। उनके अनुसार, उन्होंने आंदोलनकारियों से कहा था कि वह करीब 12 दिन और अनशन जारी रख सकते हैं। इसके बाद 20 जुलाई को संसद तक मार्च निकालकर सांसदों को ज्ञापन सौंपने की योजना बनाई गई थी।
20 जुलाई के मार्च में जुटी थी बड़ी भीड़
सोनम वांगचुक के मुताबिक, सहयोगियों ने संसद मार्च में करीब 10 से 15 हजार लोगों के शामिल होने का अनुमान लगाया था। हालांकि उनके अनुसार प्रदर्शन में एक लाख से अधिक लोग जुटे। उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन का उद्देश्य किसी भी तरह की तोड़फोड़ या उपद्रव करना नहीं था।
उनका कहना था कि यदि सत्ता पक्ष की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं होती, तो आंदोलनकारी विपक्षी सांसदों से मुलाकात करते। इसी दौरान कांग्रेस नेता पवन खेड़ा भी मंच पर पहुंचे थे। योजना थी कि संसद पहुंचकर आंदोलन से जुड़ा पूरा मामला सांसदों के सुपुर्द कर दिया जाए और उनसे इस मुद्दे को संसद में उठाकर समाधान निकालने की अपील की जाए।
राहुल गांधी से अनशन समाप्त करवाने की थी उम्मीद
वांगचुक ने बताया कि इसी रणनीति के तहत यह भी उम्मीद थी कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी आंदोलन स्थल पर पहुंचेंगे और उन्हें जूस पिलाकर अनशन समाप्त करवाएंगे। इसके बाद आंदोलन से जुड़े मुद्दों को संसद में उठाने की जिम्मेदारी विपक्षी नेताओं को सौंपने की योजना थी।
हालांकि वांगचुक के अनुसार, 18 जुलाई को ही प्रशासन ने उन्हें वहां से हटा दिया। इसके चलते प्रस्तावित रणनीति के मुताबिक संसद मार्च और आगे की कार्रवाई नहीं हो सकी।
अभिजीत दीपके ने लगाए गंभीर आरोप
वहीं, आंदोलन से जुड़े अभिजीत दीपके ने एक इंटरव्यू में दावा किया कि सोनम वांगचुक इस पूरे प्रदर्शन का मुख्य चेहरा थे। उन्होंने कहा कि वांगचुक की लगातार बिगड़ती सेहत को लेकर आंदोलन से जुड़े लोग चिंतित थे, लेकिन वह पीछे हटने को तैयार नहीं थे।
दीपके ने आरोप लगाया कि बाद में वांगचुक को जबरन वहां से ले जाया गया और ऐसी जगह रखा गया, जहां केवल सरकारी प्रतिनिधियों को उनसे मिलने की अनुमति थी। उनके अनुसार, आंदोलन से जुड़े सहयोगियों को वांगचुक से मिलने नहीं दिया गया और अंततः सरकारी अधिकारियों की मौजूदगी में ही उनका अनशन समाप्त हुआ।
हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित प्रशासन या अन्य पक्ष की प्रतिक्रिया इस खबर में उपलब्ध नहीं है। पूरे घटनाक्रम को लेकर वांगचुक के बयान और आंदोलन से जुड़े लोगों के दावों ने 20 जुलाई के संसद मार्च की रणनीति पर नई चर्चा छेड़ दी है।
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