बरहरवा। केंद्र और राज्य सरकार जहां आम जनों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए कई योजनाएं चला रही है, वहीं अनुमंडल अस्पताल राजमहल की स्थिति बदहाल होती जा रही है। अस्पताल में पिछले लगभग एक वर्ष से अल्ट्रासाउंड सेवा बंद है, जिसके कारण गर्भवती महिलाओं सहित बड़ी संख्या में मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, कभी मशीन खराब, तो कभी डॉक्टरों की कमी—इन्हीं वजहों से सेवा नियमित रूप से बहाल नहीं हो पाई है।
जुलाई 2024 में अल्ट्रासाउंड मशीन खराब होने से सेवा ठप रही। मशीन ठीक होने के बाद भी संबंधित डॉक्टर विभागीय प्रशिक्षण में चले गए, जिससे सेवा दोबारा शुरू नहीं हो पाई। कुछ दिनों के लिए अल्ट्रासाउंड चालू हुआ, लेकिन जुलाई 2025 में सेवा दे रहे सोनोग्राफर का स्थानांतरण कर दिया गया। इसके बाद से बीते लगभग 5 महीनों से अल्ट्रासाउंड पूरी तरह बंद पड़ा है।
अल्ट्रासाउंड सेवा नहीं होने से आर्थिक रूप से कमजोर तबके के लोगों को सबसे अधिक दिक्कत हो रही है। उन्हें मजबूरन प्राइवेट क्लीनिकों या राजमहल, साहिबगंज, भागलपुर, मालदा सहित अन्य शहरों में महंगे दाम पर अल्ट्रासाउंड कराना पड़ रहा है।
अस्पताल में डॉक्टरों की भारी कमी
राजमहल अनुमंडल अस्पताल में कुल 22 स्वीकृत डॉक्टर पद हैं, लेकिन वर्तमान में मात्र 5 डॉक्टरों के सहारे डेढ़ से दो लाख की आबादी की स्वास्थ्य व्यवस्था चल रही है। इससे अधिकांश विभागों में सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
कुछ महीने पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राजमहल में आयोजित एक कार्यक्रम से लौटते समय अचानक अस्पताल का निरीक्षण किया था और व्यवस्था सुधारने का आश्वासन भी दिया था। लोगों को उम्मीद थी कि इससे स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। मजबूरन मरीजों को इलाज के लिए पश्चिम बंगाल और बिहार सहित अन्य जगहों का रुख करना पड़ रहा है।
क्या कहते हैं अधिकारी?
डॉ. उदय टुडू, प्रभारी उपाधीक्षक, अनुमंडल अस्पताल राजमहल ने बताया—
“सोनोलॉजिस्ट अथवा एमडी रेडियोलॉजिस्ट की कमी के कारण अल्ट्रासाउंड सेवा प्रभावित है। इसकी जानकारी विभागीय वरीय पदाधिकारियों को दे दी गई है। सेवा कब से बंद है, यह रिकॉर्ड देखकर स्पष्ट होगा। डॉक्टरों की कमी भी गंभीर समस्या है, वर्तमान में केवल पाँच डॉक्टरों के भरोसे अस्पताल चल रहा है।”