अनूप कुमार गुप्ता,
न्यूज अप्रैजल प्रतिनिधि, गढ़वा। उपायुक्त के निर्देश पर सदर अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) संजय कुमार ने गुरुवार को शहर के तीन अल्ट्रासाउंड केंद्रों की औचक जांच की। जांच के क्रम में सभी केंद्रों में प्रथम दृष्टया अनियमितता व गंभीर विसंगतियां पाई गईं। विषय की संवेदनशीलता को देखते हुए एसडीएम ने सभी केंद्रों को तत्काल प्रभाव से बंद करने का निर्देश दिया और स्पष्ट किया कि सिविल सर्जन या उनकी ओर से गठित टीम द्वारा जांच कर क्लीन चिट मिलने तक कोई भी केंद्र नहीं खुलेगा।
सबसे पहले टाउन हॉल मैदान के पास स्थित झारखंड अल्ट्रासाउंड सेंटर की जांच की गई। यहां पता चला कि नामांकित चिकित्सक डॉ. अभिषेक कुमार बीते 6-7 महीने से केंद्र नहीं आ रहे हैं, इसके बावजूद अल्ट्रासाउंड जारी था। रजिस्टर की जांच में अद्यतन तिथि तक की प्रविष्टियां तो मिलीं, लेकिन दो प्रकार के रजिस्टर पाए गए। मौके पर 12वीं पास युवक और युवती कार्यरत मिले, जिससे मामला और अधिक संदिग्ध हो गया। सिविल सर्जन को सूचना देते हुए केंद्र को तत्काल बंद कर चाबी रविकांत दुबे को अंडरटेकन के साथ सौंपी गई।
दूसरी जांच चंद्रिका हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, कचहरी रोड में की गई। यहां अल्ट्रासाउंड सेवा देने वाले डॉ. कादिर परवेज से संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि जुलाई में उन्होंने केवल 8-10 अल्ट्रासाउंड किए हैं। लेकिन जब उनसे मरीजों की सूची मांगी गई, तो वह देने में असमर्थ रहे। साथ ही यह भी सामने आया कि डॉ. परवेज ने पहले ही इस केंद्र से अपनी संबद्धता समाप्त करने के लिए आवेदन दे रखा है। स्थिति को गंभीर मानते हुए एसडीएम ने केंद्र को बंद कर चाबी प्रबंधक अयूब अंसारी को दी।
तीसरी जांच एमजीएम अस्पताल, नवादा मोड़ के पास स्थित अल्ट्रासाउंड केंद्र में की गई। यहां भी डॉ. परवेज के नाम पर अल्ट्रासाउंड किया जा रहा था, लेकिन डॉक्टर ने स्वयं स्वीकार किया कि वे 15 दिन में एक बार ही आते हैं। वहीं, रजिस्टर में 25 जुलाई तक की लगातार प्रविष्टियां दर्ज थीं। पूछताछ में अस्पताल संचालक ने स्पष्ट रूप से बताया कि अल्ट्रासाउंड कार्य टेक्नीशियन द्वारा किया जा रहा है। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए एसडीएम ने इस केंद्र को भी बंद करने का आदेश दिया और चाबी अस्पताल प्रबंधन के हवाले की।
एसडीएम संजय कुमार ने बताया कि अल्ट्रासाउंड जैसी संवेदनशील जांच सेवाओं में यदि गड़बड़ी मिलती है तो इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी केंद्रों की जांच रिपोर्ट सिविल सर्जन को भेजी जा रही है, ताकि विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।