मयूरकोला में लक्खी पूजा संपन्न,शरद पूर्णिमा पर चांदनी में रखी खीर
मयूरकोला में श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुई लक्खी पूजा, चांदनी में रखी खीर का सुबह किया सेवन

कोटालपोखर संवाददाता। साहिबगंज जिले के मयूरकोला में शरद पूर्णिमा के अवसर पर मां लक्ष्मी की आराधना में श्रद्धालु लीन रहे। बंगाली परंपरा के अनुसार आयोजित लक्खी पूजा में शंख ध्वनि, मंत्रोच्चार और आरती से वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने मां लक्ष्मी के समक्ष शीश नवाकर सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।
शंख ध्वनि और आरती से गूंज उठा पूजा स्थल
शाम ढलते ही मयूरकोला में पूजा-अर्चना का सिलसिला शुरू हो गया। पुरोहितों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ विधि-विधान से पूजा संपन्न कराई। शंख ध्वनि, मंत्रोच्चार और आरती के बीच श्रद्धालुओं ने मां लक्ष्मी की उपासना की। बंगाली समुदाय के घरों के साथ-साथ क्षेत्र के विभिन्न दुर्गा मंदिरों में भी देर रात तक पूजा-अर्चना होती रही।

लक्खी पूजा के आयोजन में बंगाली संस्कृति और धार्मिक आस्था की अनूठी झलक देखने को मिली। पूरे क्षेत्र में श्रद्धा और भक्ति का माहौल बना रहा।
चांदनी में रखी खीर, सुबह किया सेवन
शरद पूर्णिमा की परंपरा के अनुसार श्रद्धालुओं ने खीर बनाकर रातभर चंद्रमा की रोशनी में रखी। सुबह श्रद्धालुओं ने इस खीर का सेवन किया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की चांदनी में रखी खीर का विशेष महत्व माना जाता है।
मां लक्ष्मी की आराधना, पारंपरिक पूजा-विधि और खीर सेवन की परंपरा के साथ मयूरकोला में लक्खी पूजा श्रद्धा और उल्लास के वातावरण में संपन्न हुई।
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