तारापीठ मंदिर में 40 दिनों बाद मूल गर्भगृह में लौटेंगी मां तारा
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तारापीठ। रिपोर्ट: निशांत कुमार सोनू,
तारापीठ:- 40 दिनों के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार मां तारा अपने मूल गर्भगृह में लौटेंगी। कोजागरी लक्ष्मी पूजा के पावन अवसर पर रविवार को तारापीठ मंदिर में यह विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होगा। शाम की आरती के बाद मां तारा को नवीनीकृत मुख्य गर्भगृह में पुनः विराजमान कराने की तैयारी है। इस दौरान देवी की पूजा राजराजेश्वरी रूप में की जाएगी। मां तारा की घर वापसी को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है। भक्तों को एक बार फिर अपने आराध्य के मूल स्थान पर दर्शन करने का अवसर मिलेगा।

14 सितंबर से शिव मंदिर में हो रही थी पूजा
मुख्य गर्भगृह के नवीनीकरण कार्य के कारण मां तारा को 14 सितंबर को कौशिकी अमावस्या के दो दिन बाद उनके मूल स्थान से हटाकर मंदिर के सामने स्थित शिव मंदिर में स्थापित किया गया था। तभी से देवी की नियमित पूजा-अर्चना और दर्शन शिव मंदिर में ही हो रहे थे। गर्भगृह के नवीनीकरण के चलते श्रद्धालुओं को मां तारा के मूल स्थान पर दर्शन के लिए इंतजार करना पड़ा। अब काम पूरा होने के बाद देवी की वापसी का रास्ता साफ हो गया है।
महालया से पहले वापसी की थी तैयारी, बढ़ गया इंतजार
मंदिर प्रबंधन की योजना थी कि महालया से पहले ही मां तारा को मुख्य गर्भगृह में पुनः स्थापित कर दिया जाएगा। लेकिन नवीनीकरण कार्य में देरी के कारण यह समयसीमा पूरी नहीं हो सकी। दुर्गापूजा की षष्ठी तिथि तक भी गर्भगृह तैयार नहीं होने से देवी की वापसी टलती रही। ऐसे में श्रद्धालुओं को मां तारा के मूल स्थान पर दर्शन के लिए और इंतजार करना पड़ा। अब कोजागरी लक्ष्मी पूजा पर यह प्रतीक्षा समाप्त होने जा रही है।
पहले विरामस्थल, फिर गर्भगृह में होगी वापसी
मंदिर कमेटी की योजना के अनुसार, रविवार को मां तारा को शिव मंदिर से विरामस्थल लाया जाएगा। यहां दिनभर पूजा-अर्चना और दर्शन की व्यवस्था रहेगी। इसके बाद शाम की आरती के उपरांत देवी को नवीनीकृत मुख्य गर्भगृह में पुनः विराजमान कराया जाएगा। कोजागरी लक्ष्मी पूजा के दिन मां तारा की यह वापसी तारापीठ के श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखती है। करीब 40 दिनों बाद अपने मूल गर्भगृह में विराजमान मां तारा के राजराजेश्वरी स्वरूप के दर्शन के लिए भक्तों में उत्सुकता बनी हुई है
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