मयूरकोला में सिंदूर खेला के साथ मां दुर्गा को विदाई, सुहागिनों ने की अखंड सौभाग्य की कामना
सिंदूर खेला के साथ मां दुर्गा को दी गई भावभीनी विदाई, आस्था के रंग में सराबोर हुईं सुहागिनें

अनिकेत कुमार सोनू की रिपोर्ट,
कोटालपोखर संवाददाता | मयूरकोला: विजयादशमी के अवसर पर मयूरकोला गांव में पारंपरिक सिंदूर खेला के साथ मां दुर्गा को भावभीनी विदाई दी गई। सिंदूर की लालिमा, मां दुर्गा के जयकारों और भक्तिमय माहौल के बीच सुहागिन महिलाओं ने मां के चरणों में सिंदूर अर्पित कर अखंड सौभाग्य की कामना की। इसके बाद महिलाओं ने एक-दूसरे के माथे और गालों पर सिंदूर लगाकर सुखी वैवाहिक जीवन, परिवार की खुशहाली और समृद्धि की मंगलकामना की। इस आयोजन के साथ ही गांव में दुर्गोत्सव का समापन हुआ।
पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुई रस्म
दुर्गापूजा के अंतिम दिन आयोजित सिंदूर खेला में महिलाओं ने पूरे श्रद्धाभाव और उत्साह के साथ परंपरा का निर्वहन किया। मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित करने के बाद एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर प्रेम, सौहार्द और खुशहाली का संदेश दिया। इस दौरान देश में सुख-शांति, समृद्धि और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की प्रार्थना भी की गई।

सुहाग और सौभाग्य का प्रतीक है सिंदूर खेला
सिंदूर खेला दुर्गोत्सव की प्रमुख पारंपरिक रस्मों में से एक है। विजयादशमी के दिन मां दुर्गा की विदाई से पहले सुहागिन महिलाएं मां को सिंदूर अर्पित करती हैं और एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं। यह परंपरा धार्मिक आस्था के साथ-साथ आपसी स्नेह, महिला एकजुटता और सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक मानी जाती है।
मां की विदाई के साथ अगले वर्ष आगमन की प्रतीक्षा
मां दुर्गा की विदाई के दौरान भक्तों के मन में भावुकता का माहौल रहा। श्रद्धालुओं ने मां से अपने परिवार और समाज पर कृपा बनाए रखने की प्रार्थना की। सिंदूर खेला के रंगों ने दुर्गोत्सव के अंतिम दिन को यादगार बना दिया। मां की विदाई के साथ ही भक्तों के मन में अगले वर्ष फिर से मां के आगमन की प्रतीक्षा शुरू हो गई।
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