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हिंदी विश्व की प्रमुख भाषाओं में से एक है और राष्ट्र चेतना की सशक्त वाहक है। नवी मुंबई में आयोजित हिंदी दिवस 2026 एवं अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि हिंदी केवल संप्रेषण का माध्यम ही नहीं, बल्कि देश की एकता, संस्कृति और पहचान का प्रतीक भी है।
कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों से आए विद्वानों, शिक्षाविदों और प्रशासनिक अधिकारियों ने भाग लिया। इस दौरान हिंदी के प्रचार-प्रसार, सरकारी कामकाज में राजभाषा के प्रभावी उपयोग और नई पीढ़ी को हिंदी से जोड़ने पर विस्तार से चर्चा की गई।
वक्ताओं ने कहा कि वैश्वीकरण के दौर में हिंदी का महत्व लगातार बढ़ रहा है और डिजिटल माध्यमों पर इसकी उपस्थिति तेजी से सशक्त हो रही है। उन्होंने यह भी जोर दिया कि राजभाषा के रूप में हिंदी का प्रयोग केवल औपचारिकता तक सीमित न रहे, बल्कि इसे व्यवहार में लाया जाए।
सम्मेलन में हिंदी लेखन, अनुवाद और तकनीकी क्षेत्र में इसके उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव भी प्रस्तुत किए गए। अंत में आयोजकों ने हिंदी के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।

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