18,600 फीट की बर्फीली चोटी पर रेस्क्यू, एक स्किड पर टिका हेलिकॉप्टर;भारतीय सेना ने बचाई मरीज की जान
नुन कुन पर्वतमाला में बेहद चुनौतीपूर्ण एयरलिफ्ट ऑपरेशन, कम ऑक्सीजन और तेज हवाओं के बीच पायलटों ने दिखाया अद्भुत साहस

नई दिल्ली, 30 अगस्त। (आरएनएस) भारतीय सेना के जवानों और पायलटों ने लद्दाख की नुन कुन पर्वतमाला में करीब 18,600 फीट की ऊंचाई पर एक बेहद चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया। दुर्गम बर्फीले इलाके, तेज हवाओं, खड़ी ढलान और बेहद कम ऑक्सीजन के बीच सेना की एविएशन विंग ने गंभीर रूप से बीमार एक मरीज को सुरक्षित एयरलिफ्ट कर अस्पताल पहुंचाया।
इस रेस्क्यू ऑपरेशन में सबसे बड़ी चुनौती ऊंचाई और भौगोलिक परिस्थितियां थीं। इतनी ऊंचाई पर वायुदाब कम होने के कारण हेलिकॉप्टर के इंजन और रोटर की लिफ्ट क्षमता प्रभावित होती है। इसके बावजूद सेना के पायलटों ने सूझबूझ और तकनीकी दक्षता का परिचय देते हुए मिशन को सफल बनाया।
वजन कम कर तैयार किया गया हेलिकॉप्टर
मिशन से पहले हेलिकॉप्टर से गैर-जरूरी उपकरणों को हटाकर उसका वजन कम किया गया। साथ ही आवश्यकता के अनुसार सीमित मात्रा में ईंधन रखा गया, ताकि हेलिकॉप्टर की लिफ्ट क्षमता को अधिकतम किया जा सके। चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में मरीज को सुरक्षित निकालना ही अभियान की प्राथमिकता थी।

सिर्फ एक स्किड के सहारे हेलिकॉप्टर का संतुलन
मरीज तक पहुंचने के बाद पायलटों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षित लैंडिंग की थी। पहाड़ की खड़ी और बर्फीली ढलान पर हेलिकॉप्टर उतारने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं थी। ऐसी स्थिति में सामान्य लैंडिंग संभव नहीं थी।
पायलटों ने हेलिकॉप्टर को बेहद कम ऊंचाई पर स्थिर रखते हुए ऐसा संतुलन बनाया कि उसका सिर्फ एक स्किड बर्फीली ढलान को छू रहा था। इसी दौरान क्रू सदस्यों ने तेजी से मरीज को हेलिकॉप्टर के अंदर खींच लिया। बेहद कम समय में पूरी कार्रवाई पूरी की गई और मरीज को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया गया।
‘फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स’ ने साझा की तस्वीरें
सफल रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद भारतीय सेना की ‘फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स’ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अभियान की तस्वीरें साझा कीं। सेना के मुताबिक, दिन के आखिरी उपलब्ध लैंडिंग विंडो के दौरान बेहद विपरीत परिस्थितियों में यह अभियान चलाया गया।
सेना ने इस ऑपरेशन को अपनी उच्च दक्षता, साहस और मानवीय संवेदनशीलता का उदाहरण बताया। समय रहते मरीज को सुरक्षित निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया, जिससे उसकी जान बचाने में मदद मिली।
18,600 फीट की ऊंचाई पर किया गया यह रेस्क्यू ऑपरेशन भारतीय सेना के पायलटों और जवानों के साहस, प्रशिक्षण और तकनीकी दक्षता की एक और मिसाल बनकर सामने आया है।
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