रिपोर्टिंग: प्रेम कुमार साहू
स्थान: घाघरा, गुमला,
घाघरा (गुमला)।
घाघरा प्रखंड के सुदूरवर्ती दिरगांव पंचायत अंतर्गत झलकापाट गांव से एक हृदयविदारक मामला सामने आया है, जिसने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की बदहाली को उजागर कर दिया है। सड़क सुविधा के अभाव में एक गर्भवती महिला की समय पर इलाज नहीं मिल पाने के कारण मौत हो गई।
जानकारी के अनुसार, आदिम जनजाति समुदाय से संबंध रखने वाली गर्भवती महिला सुकरी कुमारी (पति—जगन्नाथ कोरवा) की तबीयत अचानक बिगड़ने पर परिजन उसे इलाज के लिए ले जाने को मजबूर हुए। गांव तक सड़क नहीं होने के कारण परिजनों ने महिला को झीलकी पर बोहकर लगभग एक किलोमीटर पैदल चलकर काडासिल्ली गांव तक पहुंचाया। नक्सल प्रभावित और दुर्गम क्षेत्र होने के कारण यह सफर बेहद कठिन और जोखिम भरा रहा।
काडासिल्ली पहुंचने के बाद महिला को ममता वाहन के माध्यम से घाघरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। वहां चिकित्सकों ने हालत गंभीर देखते हुए उसे गुमला सदर अस्पताल रेफर कर दिया। हालांकि इलाज में हुई देरी और संसाधनों की कमी के चलते महिला की मौत हो गई।
यह घटना केवल एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं, बल्कि सुदूर ग्रामीण इलाकों में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाल स्थिति को उजागर करती है। सवाल यह उठता है कि योजनाओं और दावों के बावजूद आज भी आदिवासी और दूरस्थ गांवों तक बुनियादी सुविधाएं क्यों नहीं पहुंच पा रही हैं।