महान क्रांतिकारी थे भगवान बिरसा मुंडा:कमलेश उरांव
लातेहार: युवा छात्र नेता कमलेश उरांव ने भगवान बिरसा मुंडा के जयंती पर वीर शहीद के नाम दीप जलाकर नमन किया, कमलेश उरांव ने उनके जीवनी के बारे में बताते हुए कहा कि बिरसा मुंडा धार्मिक गुरु के रूप में मुंडा आदिवासी जनजातिय समाज में स्थापित हो चुके थे,भगवान बिरसा मुंडा के पास अध्यात्मिक शक्ति और दिव्य शक्ति भी था.
बिरसा मुंडा ने एक दिन घोषणा की वह पृथ्वी पिता यानी धरती आबा है,और मुंडा एवं जनजातीय समाज के लोग उन्हें भगवान की तरह मानने लगे।उन्होंने बताया कि जन्म 15 नवम्बर 1875 को झारखंड के उलीहातू गांव में हुआ था,उनके पिता का नाम सुगना मुंडा और माता का नाम करमी मुंडा था.
बिरसा मुंडा ने साल्गा गांव में शुरूआती पढ़ाई की और फिर चाईबासा के गोस्नर इवेंजेलिकल लुथरन चर्च स्कूल में पढ़ाई की और वहां पर बिरसा मुंडा को जबरन ईसाई धर्म अपनाने के लिए दबाव बनाया जा रहा था,लेकिन वे बोले हम मरना पसंद करेंगे लेकिन ईसाई धर्म अपनाना पसंद नहीं करेंगे।
बिरसा मुंडा ने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का विगुल तब बजाया था जब वे 25 साल के भी नहीं हुए थे, बिरसा मुंडा ने अंग्रेजों द्वारा लागू जमींदारी प्रथा, धर्मांतरण और जनजातियों के पारंपरिक जीवन पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ संघर्ष किया,बिरसा मुंडा ने जल, जंगल, जमीन जैसे संसाधनों की रक्षा,नारी की रक्षा और सुरक्षा, और अपने समाज की सांस्कृतिक की मर्यादा बनाए रखने के लिए उलगुलान किया,और हमारे महापुरुष वीर योद्धा मरते नहीं हैं शहीद होते हैं।