गंगा आरती की दिव्यता,डांडिया की धमक और आस्था के सैलाब के बीच संपन्न हुआ अमड़ापाड़ा का 102वां ऐतिहासिक दुर्गोत्सव
Pakud News

राहुल कुमार की रिपोर्ट,
अमड़ापाड़ा: आस्था का सैलाब, भक्ति की अविरल धारा और संस्कृति के रंगों का अद्भुत संगम! नौ दिनों तक मां दुर्गा की आराधना में डूबा अमड़ापाड़ा का माहौल गंगा आरती की दिव्यता और डांडिया की धमक से सराबोर रहा। श्री श्री 108 सार्वजनिक दुर्गापूजा समिति की ओर से आयोजित 102वां ऐतिहासिक दुर्गोत्सव भव्य धार्मिक अनुष्ठानों, आकर्षक गुलाबी पंडाल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की यादें छोड़ते हुए संपन्न हो गया। वैष्णवी दुर्गा मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने जहां मां के प्रति अटूट आस्था का परिचय दिया, वहीं वाराणसी की टीम की भव्य गंगा आरती और हजारों महिलाओं की डांडिया प्रस्तुति ने उत्सव में चार चांद लगा दिए।
कलश स्थापना से शुरू हुई आराधना, जयकारों से गूंजता रहा मंदिर परिसर
शारदीय नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा की पूजा-अर्चना शुरू हुई। वैष्णवी दुर्गा मंदिर में बनारस से पहुंचे आचार्य सुनील मिश्र और नागेश मिश्र के मार्गदर्शन में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए गए। नवरात्र के विभिन्न दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा हुई। सप्तमी को नवपत्रिका प्रवेश के बाद बांसलोई नदी से जल लाकर धार्मिक विधियां पूरी की गईं। बिल्वाभिमंत्रण पूजा के बाद जैसे ही माता का पट खुला, मंदिर परिसर मां दुर्गा के जयकारों से गूंज उठा। दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

रात दो बजे से लगी कतार, एक हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने चढ़ाया प्रसाद।
महाष्टमी पर मां दुर्गा के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का भव्य नजारा देखने को मिला। माता को प्रसाद अर्पित करने के लिए रात दो बजे से ही भक्तों की कतार लगनी शुरू हो गई। एक हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने प्रसाद चढ़ाकर मां का आशीर्वाद मांगा। कई भक्तों ने उपवास रखकर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। देर तक मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। महाष्टमी की पूजा ने दुर्गोत्सव की धार्मिक भव्यता को और खास बना दिया।
वाराणसी की गंगा आरती से भक्तिमय हुआ माहौल, एसपी समेत अधिकारी हुए शामिल
महाष्टमी की रात आठ बजे वैष्णवी दुर्गा मंदिर परिसर में आयोजित भव्य गंगा आरती उत्सव का प्रमुख आकर्षण बनी। वाराणसी से आई टीम ने पारंपरिक विधि-विधान के साथ आरती संपन्न कराई। भक्ति और आध्यात्मिकता से ओतप्रोत इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। पाकुड़ के पुलिस अधीक्षक अनुदीप सिंह अपने परिवार के साथ आरती में शामिल हुए। उनके साथ एसडीपीओ विजय कुमार, अंचल अधिकारी औसाफ अहमद खान और प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. खालिद अहमद भी मौजूद रहे। गंगा आरती के बाद कन्या पूजन किया गया। धार्मिक अनुष्ठानों ने श्रद्धालुओं को भक्ति के रंग में रंग दिया।
महानवमी पर कुष्मांड बलि, डांडिया की थाप पर झूमीं हजारों महिलाएं
महानवमी पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना और कुष्मांड बलि का अनुष्ठान संपन्न हुआ। रात आठ बजे वैष्णवी दुर्गा मंदिर परिसर में आयोजित डांडिया कार्यक्रम में हजारों महिलाओं की भागीदारी ने उत्सव को नई ऊर्जा दी। पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं ने संगीत की धुन पर डांडिया खेलकर सांस्कृतिक छटा बिखेरी। डांडिया की खनक और उत्साह से पूरा परिसर गूंज उठा। विजयादशमी के दिन भी डांडिया नृत्य का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने हिस्सा लिया। धार्मिक आस्था के साथ सांस्कृतिक परंपराओं का यह संगम लोगों के लिए खास आकर्षण बना रहा।
नगर भ्रमण और कलश विसर्जन के साथ दुर्गोत्सव का समापन
विजयादशमी के दिन मंगलवार को नगर भ्रमण और कलश विसर्जन के साथ नौ दिवसीय दुर्गोत्सव संपन्न हुआ। इस अवसर पर महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं। मां दुर्गा की आराधना से शुरू हुआ उत्सव गंगा आरती, कन्या पूजन, डांडिया और अन्य धार्मिक आयोजनों के साथ अपने चरम पर पहुंचा। नौ दिनों तक अमड़ापाड़ा में भक्ति, उत्साह और उल्लास का माहौल कायम रहा। 102वें वर्ष का यह ऐतिहासिक दुर्गोत्सव धार्मिक परंपराओं, सामूहिक सहभागिता और सांस्कृतिक विरासत की जीवंत मिसाल बनकर संपन्न हुआ।
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