सिंदूर खेला के साथ मां दुर्गा को विदाई, नम आंखों से गूंजा ‘अगले बरस फिर आना मां’
नलहाटी में सिंदूर की लालिमा, जयकारों की गूंज और विदाई के आंसुओं के बीच संपन्न हुआ दुर्गोत्सव, सुहागिनों ने मां से मांगी सुख-समृद्धि की कामना

नलहाटी : कहीं सिंदूर खेला का उल्लास, कहीं मां दुर्गा के जयकारे, तो कहीं विदाई की बेला में छलकते आंसू। विजयादशमी पर बुधवार को नलहाटी के विभिन्न दुर्गा पूजा पंडालों में आस्था, परंपरा और भावनाओं का ऐसा संगम दिखा, जिसने हर श्रद्धालु को भावुक कर दिया। सुहागिन महिलाओं ने मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित कर पारंपरिक सिंदूर खेला की रस्म निभायी और एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर सुख-समृद्धि, अखंड सौभाग्य व परिवार की खुशहाली की कामना की। वहीं, मां की विदाई की घड़ी आते ही उत्सव का उल्लास भावुकता में बदल गया। श्रद्धालुओं की आंखें नम थीं और जुबां पर बस एक ही पुकार थी—‘मां, अगले बरस फिर आना।

पूजा-अर्चना के बाद सिंदूर खेला, परंपरा में दिखी आस्था की झलक
विजयादशमी की सुबह उदयन संघ, हिंद क्लब, चाल बाजार सार्वजनिक दुर्गा पूजा मंडप और कमारपाड़ा दुर्गा मंदिर समेत विभिन्न पूजा स्थलों पर विधि-विधान से दशमी की पूजा और पुष्पांजलि संपन्न हुई। इसके बाद सुहागिन महिलाओं ने मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित किया और एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन किया। माथे से चेहरे तक सिंदूर की लालिमा और महिलाओं के बीच उत्साह ने पूजा पंडालों के माहौल को खास बना दिया। महिलाओं ने एक-दूसरे को विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।
सिंदूर की लालिमा के बीच उमड़ा उत्साह
नलहाटी उदयन संघ, हिंद क्लब द्वारा संचालित चाल बाजार सार्वजनिक दुर्गा पूजा मंडप और कमारपाड़ा दुर्गा मंदिर परिसर में सिंदूर खेला को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं ने पूरे उत्साह के साथ एक-दूसरे को सिंदूर लगाया। मां दुर्गा के जयकारों से पूजा मंडप गूंजते रहे और श्रद्धालुओं ने पर्व की खुशियां साझा कीं। सिंदूर खेला ने जहां उत्सव के अंतिम दिन को रंगों और उमंग से भर दिया, वहीं मां की विदाई की आहट ने भक्तों के मन को भावुक भी कर दिया।
मां की विदाई पर छलकीं आंखें, अगले बरस का इंतजार शुरू
विजयादशमी के साथ ही शारदीय दुर्गोत्सव का समापन हो गया। मां दुर्गा की विदाई के समय पूजा पंडालों में भावुकता का माहौल छा गया। जिन पंडालों में पिछले कई दिनों से भक्ति, उत्साह और उल्लास की धूम थी, वहां विदाई की घड़ी में श्रद्धालु भावुक नजर आये। मां के प्रति अटूट आस्था व्यक्त करते हुए भक्तों ने उनसे अगले वर्ष फिर आने और सभी पर अपनी कृपा बनाये रखने की प्रार्थना की।
नलहाटी में दुर्गोत्सव का अंतिम दिन एक ओर सिंदूर खेला की जीवंत परंपरा का साक्षी बना, तो दूसरी ओर मां से बिछड़ने की कसक भी छोड़ गया। सिंदूर की लालिमा, जयकारों की गूंज और नम आंखों के बीच उत्सव को विदाई दी गयी। मां दुर्गा की विदाई के साथ ही पंडालों की रौनक भले ही कम हो गयी, लेकिन श्रद्धालुओं के मन में अगले शारदीय नवरात्र का इंतजार शुरू हो गया।
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