पाकुड़ में सरस्वती पुस्तकालय दुर्गापूजा समिति का भव्य डांडिया उत्सव, कोलकाता के कलाकारों ने बांधा समां
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पाकुड़ में सरस्वती पुस्तकालय दुर्गापूजा समिति का भव्य डांडिया उत्सव, कोलकाता के कलाकारों ने बांधा समां
आरजे स्टेडियम में उमड़ा जनसैलाब, मां दुर्गा की आरती के बाद संगीत और नृत्य की प्रस्तुतियों ने मोहा मन
पाकुड़ संवाददाता। नवरात्रि के उल्लास के बीच रविवार को पाकुड़ के आरजे स्टेडियम में सरस्वती पुस्तकालय सार्वजनिक दुर्गापूजा समिति की ओर से भव्य डांडिया उत्सव का आयोजन किया गया। मां दुर्गा की आराधना से शुरू हुए इस कार्यक्रम में भक्ति, संगीत और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं और युवतियों ने डांडिया नृत्य की आकर्षक प्रस्तुतियों से माहौल को उत्सवमय बना दिया। वहीं, कोलकाता से आए कलाकारों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया।

दीप प्रज्वलन और मां दुर्गा की आरती से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी संजीत कुमार चंद्र तथा समिति के अध्यक्ष सह समाजसेवी अमलान कुसुम सिन्हा उर्फ बुलटी दा ने दीप प्रज्वलित कर किया। इसके बाद मां दुर्गा की पूजा-अर्चना और आरती की गई। मां के जयकारों से पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा। धार्मिक अनुष्ठान के बाद संगीत और डांडिया नृत्य का सिलसिला शुरू हुआ, जिससे आयोजन की रौनक और बढ़ गई।
पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं ने बिखेरी छटा
डांडिया उत्सव में महिलाओं और युवतियों की भागीदारी विशेष आकर्षण रही। रंग-बिरंगे लहंगे, पारंपरिक आभूषण और हाथों में डांडिया की छड़ियां लिए प्रतिभागियों ने संगीत की धुन पर सामूहिक नृत्य प्रस्तुत किया। डांडिया की खनक और संगीत की गूंज से आरजे स्टेडियम का माहौल उत्साह से भर गया।
युवाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। प्रतिभागियों के उत्साह और शानदार नृत्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों को देर तक बांधे रखा। पूरे कार्यक्रम के दौरान तालियों की गूंज और उत्सव का उल्लास देखने को मिला।
कोलकाता के कलाकारों की प्रस्तुति बनी आकर्षण
उत्सव में कोलकाता से आए कलाकारों ने आकर्षक डांडिया प्रस्तुतियां दीं। संगीत और नृत्य की शानदार जुगलबंदी ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। कलाकारों की प्रस्तुति पर दर्शक भी झूम उठे। देर तक चले इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में लोगों ने नवरात्रि के उत्सव का आनंद लिया।
आस्था और परंपरा का प्रतीक है डांडिया
नवरात्रि के दौरान डांडिया नृत्य का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। यह नृत्य देवी शक्ति की आराधना और बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। समय के साथ डांडिया धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक मेल-मिलाप और सांस्कृतिक एकता का भी माध्यम बन गया है।
उत्सव में शामिल महिलाओं ने कहा कि इस तरह के आयोजन उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने, नई ऊर्जा प्राप्त करने और एक-दूसरे से जुड़ने का अवसर देते हैं। ऐसे कार्यक्रमों से पारंपरिक संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में भी मदद मिलती है।

सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का संदेश
सरस्वती पुस्तकालय सार्वजनिक दुर्गापूजा समिति की ओर से आयोजित इस डांडिया उत्सव ने पाकुड़ में नवरात्रि की रौनक को और बढ़ा दिया। मां दुर्गा की आराधना से शुरू हुआ कार्यक्रम संगीत, नृत्य और सामूहिक उल्लास के बीच यादगार बन गया।
आयोजन ने धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकजुटता का संदेश दिया। आरजे स्टेडियम में उमड़ा उत्साह इस बात का प्रमाण रहा कि ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम समाज के विभिन्न वर्गों को एक मंच पर लाने और आपसी सद्भाव को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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